शिमला : केंद्र सरकार नवउदारवादी नीतियों के विराेध में माकपा ने चलाया था राज्यव्यापी अभियान
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला
भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर केंद्र में बीजेपी की मोदी सरकार के द्वारा लागू की जा रही नवउदारवादी नीतियों के चलते बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी, मंहगाई, असमानता व जनता की रोजी-रोटी पर बढ़ते हमलों के विरूद्ध 22 फरवरी से 28 फरवरी, 2023 तक राज्यव्यापी अभियान चलाया और आज 28 फरवरी को जिला, उपमंडल, ब्लॉक व तहसील स्तर पर प्रदर्शन किए गए। आज शिमला में भी जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया गया। 2014 के बाद से जबसे बीजेपी की मोदी सरकार सत्ता में आई है देश में व्यापक बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, असमानता बढ़ी है व जनता की रोजी रोटी पर हमले जारी हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था का लड़खड़ाना जारी है तथा मंदी की हालत और तीव्र हो रही हैं। मोदी सरकार मात्र प्रचार प्रसार कर ही दावे कर रही है कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है, परंतु सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक निवेश ही नही कर रही है। जिससे देश में रोज़गार नही बढ़ रहा है तथा जनता की गरीबी व बदहाली बढ़ रही है। सरकार की इन नीतियों से अमीर और अमीर और गरीब और गरीब हुआ है।
मोदी सरकार की नवउदारवादी नीतियों के चलते देश में बेरोजगारी व्यापक रूप से बढ़ी है। देश में बेरोजगारी की दर 7 प्रतिशत से उपर ही रही है और शहरी बेरोजगारी की दर तो 8 से 10 प्रतिशत के बीच रही है। सरकार नियमित रोजगार को समाप्त कर आउटसोर्स, पार्ट टाइम, ठेका पर कार्य करने के लिए मजबूर कर रही है। सरकार सामाजिक क्षेत्र पर खर्च घटा कर जनता की आजीविका पर बड़ा हमला कर रही है। वर्ष 2023- 24 के बजट में मनरेगा व खाद्य सबसिडी में भारी कटौती की गई है। जहां वर्ष 2021- 22 में मनरेगा पर 1,25,000 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। वहीं, इस वर्ष के बजट में मात्र 60000 करोड़ रूपए का प्रवधान किया गया है। बजट में खाद्य सबसिडी पर भी 90000 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। सरकार एक ओर 81.35 करोड़ लोगो को 5 किलो मुफ्त राशन देने का ढिंढोरा पीट रही है दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मिलने वाले 5 किलो सस्ते राशन को बंद कर रही है। बाजार में रसोई गैस,खाद्य वस्तुओं व अन्य आवश्यक वस्तुओं तथा दवाओं के दामों में भारी वृद्धि हो रही है। बढ़ती महंगाई से जनता की परेशानी बढ़ गई है।
मोदी सरकार कॉर्पोरेट घरानों व अमीरों को टैक्स में लाखों करोड़ रुपए की छूट दे रही है, जिससे देश की जनता में असमानता बढ़ रही है। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत से अधिक का स्वामित्व आबादी के मात्र एक प्रतिशत हिस्से के पास है। दूसरी ओर सबसे निचले पायदान पर खड़ी देश की 50 प्रतिशत आबादी के हाथो में देश की कुल संपत्ति का मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा था। भारत में 2020 में अरबपतियों की संख्या जो 102 थी वह 2022 में बढ़कर 166 हो गई है। जबकि देश के करीब 23 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे हैं, जो कि दुनिया भर में गरीबी में जीने वालों की सबसे बड़ी संख्या है। देश की निचले पायदान पर जी रही 50 प्रतिशत आबादी अप्रत्यक्ष कर के रूप में सबसे अमीर 10 प्रतिशत आबादी की तुलना में 6 गुणा अधिक टैक्स देती है। हिंडेनबर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर लगाए गए आरोपों से मोदी सरकार द्वारा चेहते कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों व संरक्षण की पोल खुल गई है। इसमें जो खुलासा हुआ है उससे स्पष्ट है कि अडानी ग्रुप में निवेश की गई जीवन बीमा निगम व स्टेट बैंक में देश की जनता की गाढ़ी कमाई से की गई बचत के हजारों करोड़ रूपए डूबने की कगार पर है।
केवल जीवन बीमा निगम ने ही करीब 80000 करोड़ रुपए अडानी ग्रुप में निवेश किए गए हैं तथा इस ग्रुप द्वारा राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिए गए कुल कर्ज में से 40 प्रतिशत हिस्सा एस बी आई से लिया गया है। मोदी सरकार द्वारा देश में सांप्रदायिकता की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुस्लिमों व ईसाइयों के ऊपर हमले बढ़े हैं। भाजपा शासित राज्यों में समान आचार संहिता लागू करने का निर्णय लिया है। मोदी सरकार द्वारा देश के संविधान व लोकतंत्र पर भी हमले बढ़े हैं। देश में विभाजनकारी सांप्रदायिकता की नीतियों के चलते देश की जनता की एकता को खतरा पैदा हो गया है। भाजपा की मोदी सरकार सांप्रदायिकता की राजनीति की आड़ में आम जनता के बढ़ती बेरोजगारी, मंहगाई, असमानता तथा रोजी रोटी जैसे मुख्य मुद्दे गौण करना चाहती है। सीपीएम इस प्रदर्शन के माध्यम से देश की जनता से अपील करती है कि भाजपा की मोदी सरकार की नवउदारवादी व सांप्रदायिकता की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध एकजुट होकर इनको बदलने के लिए संघर्ष करें। इस प्रदर्शन में संजय चौहान, जगत राम, विजेन्द्र मेहरा, फालमा चौहान, जगमोहन ठाकुर, सत्यवान पुंडीर, बालक राम, अनिल ठाकुर, अमित कुमार, राम सिंह, विनोद बिसरांटा, किशोरी डटवालिया, सोनिया, सुरजीत, हिम्मी ठाकुर, महेश वर्मा, कपिल, कमल, सुशील ठाकुर पूर्ण, पवन, रंजीत, रामू आदि के अतिरिक्त सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।
मुख्य मांगे-
1. रोजगार पैदा करने वाली ढांचागत परियोजनाओं में निवेश बढ़ाया जाए।
2. 5 किलोग्राम मुफ्त राशन के साथ साथ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 5 किलोग्राम सस्ता खाद्यान्न का वितरण बहाल किया जाए।
3. बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाए।
4. मनरेगा के बजट में बढ़ौतरी कर इसे 2 लाख करोड़ रूपए किया जाए। मनरेगा मजदूरों को बढ़ा हुआ वेतन दिया जाए।
5. श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी फेरबदल निरस्त करो तथा पहले के श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।
6. संपदा तथा पैतृक संपदा कर लगाया जाए।
7. कारपोरेट घरानों व अमीरों को दी गई करो में छूट वापिस लो तथा अति अमीरों पर अलग से कर की व्यवस्था करो।
8. खाद्य सामग्री व दवाओं तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं पर से GST हटाया जाए।
9. सार्वजानिक क्षेत्र का निजीकरण बंद किया जाए तथा सार्वजानिक क्षेत्र को मजबूत बनाया जाए।
