धर्मशाला : धर्मशाला कॉन्फ्रेंस हॉल में मनाया वर्ल्ड थैलेसीमिया डे
सीएमओ कांगड़ा डॉ. सुशील शर्मा की अध्यक्षता में आज वर्ल्ड थैलेसीमिया डे मनाया गया। प्रशिक्षण ले रही सीएचओ को इस बीमारी के बारे में जानकारी देने के लिए धर्मशाला कॉन्फ्रेंस हॉल में यह दिवस मनाया गया। इसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह बीमारी ब्लड से संबंधित है और यह एक जेनेटिक रोग है, जो कि बच्चों को अपने माता-पिता से प्राप्त होता है। हर वर्ष इस दिवस को मनाने का उद्देश्य, थैलेसीमिया की बीमारी के लिए जागरूकता को बढ़ाना है। इसका इस साल का थीम है बीमारी से जिन लोगों की मृत्यु हुई है उनको याद करने हेतु तथा जो इस बीमारी से जी रहे व्यक्तियों के सहास मजबूत करना, ताकि बीमारी में मनोबल न गिर सके। इस बीमारी में हिमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और लाल रक्त कणिकाएं कम हो जाती हैं, जिसमें शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है। हर वर्ष एक नए विषय के साथ यह दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने इस बीमारी से प्राप्त जानकारी को लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। आगे जानकारी देते हुए डॉ. वंदना ने थैलेसीमिया बीमारी के बारे में विस्तार से चर्चा की उन्होंने बताया कि यह बीमारी दो प्रकार की होती है, जिसमें माइनर, मेजर और उसके आगे भी प्रकार होते हैं। बीमारी में अल्फा थैलासीमिया और बिटा थैलासीमिया होते हैं, जिसमें हिमोग्लोबिन में अल्फा जींस कम हो जाते हैं। इसका पता ब्लड की जांच से ही लग सकता है जिनमें सीबीसी, आरबीसी रेटिकुलर आयरन स्टडी से पता चलता है। इसका इलाज ब्लड ट्रांसफ्यूजन बोन मैरो ट्रांसप्लांट और स्टेम सेल थेरेपी से किया जाता है। यह यह बहुत महंगी ट्रीटमेंट है 3 और 6 महीने मे इंजेक्शन लगाया जाता है। कार्यक्रम में एक पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया।
