7.98% से 99.5% तक पहुंचा हिमाचल, साक्षरता की नई मिसाल; दिल्ली में आज होगा प्रदेश का सम्मान
शिमला। कभी देश के सबसे कम साक्षर राज्यों में शामिल हिमाचल प्रदेश ने अब साक्षरता के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 1951 में प्रदेश की साक्षरता दर सिर्फ 7.98 फीसदी थी, जो अब बढ़कर 99.5 फीसदी हो गई है। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। 99.7 फीसदी साक्षरता के साथ गोवा पहले नंबर पर है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर 8 सितंबर को नई दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि शामिल होंगे। प्रदेश की ओर से साक्षरता अभियान की उपलब्धियों और काम करने के तरीके की प्रस्तुति भी दी जाएगी।
आजादी के बाद हिमाचल के सामने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी चुनौती थी। 1951 में प्रदेश की कुल साक्षरता दर केवल 7.98 फीसदी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1961 में यह 21.03 फीसदी, 1971 में 31.71 फीसदी, 1981 में 42.33 फीसदी, 1991 में 63.75 फीसदी, 2001 में 76.48 फीसदी और 2011 में 82.80 फीसदी पहुंची।
इसके बाद लगातार चलाए गए शिक्षा और साक्षरता अभियानों से प्रदेश ने तेजी से प्रगति की। कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद दूरदराज के क्षेत्रों तक स्कूल और शिक्षा की सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया गया।
साक्षरता अभियान के तहत वर्ष 2023-24 में 94,930 निरक्षरों की पहचान की गई थी। इनमें से दो वर्षों में 66 हजार से ज्यादा लोगों को साक्षर बनाया गया। अब प्रदेश में करीब 28,480 निरक्षर लोग शेष हैं।
अभियान में केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को बुनियादी गणना, डिजिटल भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट के सुरक्षित इस्तेमाल और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि साक्षरता की बड़ी चुनौती पार करने के बाद अब सरकार का फोकस शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी स्कूलों-कॉलेजों को मजबूत करने पर है। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति, तबादलों में पारदर्शिता और स्कूलों में बेहतर व्यवस्था पर जोर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले कई शिक्षण संस्थानों को लेकर सरकार को नए सिरे से विचार करना होगा। सरकारी स्कूलों में पिछले 15 वर्षों में करीब चार लाख छात्रों की कमी को उन्होंने बड़ी चुनौती बताया।
यानी 1951 में 7.98 फीसदी से शुरू हुआ हिमाचल का साक्षरता सफर आज 99.5 फीसदी तक पहुंच चुका है। अब प्रदेश की अगली चुनौती हर व्यक्ति तक शिक्षा की पहुंच के साथ-साथ सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाना है।
