हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन
हिमाचल कांग्रेस में फिर घमासान! जगत नेगी की दो टूक- मेरी राय बिना बनी कमेटियां, अब बदलेगा पूरा संगठन
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में संगठन को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। किन्नौर जिले और इसके तीन ब्लॉकों में कांग्रेस संगठन को अब नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया है। राजस्व मंत्री और किन्नौर से विधायक जगत सिंह नेगी का कहना है कि इन कमेटियों के गठन से पहले उनकी राय नहीं ली गई थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी माना है कि कार्यकारिणियों के गठन में कुछ विसंगतियां थीं। इन्हें दूर करने के बाद नई कार्यकारिणियों की घोषणा की जाएगी। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई टीम में किन नेताओं को जगह मिलती है।
दरअसल, किन्नौर में कांग्रेस जिलाध्यक्ष के तौर पर निगम भंडारी की नियुक्ति के बाद से ही विवाद चल रहा था। जगत नेगी ने इस नियुक्ति पर खुलकर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इतने अहम फैसले से पहले उनसे राय नहीं ली गई।
नेगी ने यह भी सवाल उठाया था कि चुनाव हार चुके नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों दी जा रही हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर भाजपा के कथित 'स्लीपर सेल' सक्रिय होने तक का आरोप लगाया था।
जगत नेगी और किन्नौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी के बीच मतभेद पिछले कुछ समय से सार्वजनिक रहे हैं। विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस की हिमाचल प्रभारी रजनी पाटिल ने भी दोनों नेताओं के बीच समझौते की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थीं।
विवाद के बीच निगम भंडारी ने दिल्ली जाकर कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी। इसके बाद रिकांगपिओ में उनके पदभार ग्रहण कार्यक्रम में भी संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
कमेटियां भंग होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कार्यकारिणियों में किसे जिम्मेदारी दी जाती है। जगत नेगी पहले ही संगठनात्मक नियुक्तियों में अपनी राय को महत्व देने की मांग कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने किन्नौर में नेताओं के बीच संतुलन बनाते हुए नई टीम तैयार करने की चुनौती होगी।
नई नियुक्तियों से यह भी साफ होगा कि पार्टी हाईकमान किन्नौर में किस तरह की रणनीति अपनाता है और आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को कितना मजबूत करने की कोशिश करता है।
