सुरेश कश्यप को एक्सटेंशन या विदाई, जल्द होगा स्पष्ट !
चार राज्यों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने के बाद हिमाचल भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप को बदले जाने को लेकर भी अटकलें तेज है। सुरेश कश्यप का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और उन्हें एक्सटेंशन मिलता है या उनकी विदाई होती है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बीते दिनों भाजपा ने चार राज्यों बिहार, दिल्ली, राजस्थान और ओडिशा में प्रदेश अध्यक्ष बदले है। राजस्थान में सांसद सीपी जोशी, बिहार में एमएलसी सम्राट चौधरी, दिल्ली में वीरेंद्र सचदेवा और ओडिशा में पूर्व मंत्री मनमोहन सामल को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि संगठन के बीच खींचतान को खत्म करने के लिहाज़ से भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ये फैसला लिया है। ऐसे में माहिर मान रहे है कि अन्य राज्यों की तरह ही हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा संगठन का मुखिया बदल सकती है।
बहरहाल कयासों का सिलसिला जारी है कि क्या सुरेश कश्यप के कार्यकाल को विस्तार मिलेगा या फिर प्रदेश भाजपा की बागडोर किसी नए चेहरे को सौंप दी जाएगी। यूँ तो बतौर प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप का कार्यकाल हमेशा ही सवालों के घेरे में रहा है। बीते विधानसभा चुनावों में भी खराब प्रदर्शन के कारण भाजपा के हाथों सत्ता चली गई। तब भाजपा की हार का एक बड़ा कारण लचर संगठन माना गया। इससे पहले 2021 के अंत में हुए एक लोकसभा और तीन विधानसभा उपचुनाव में भी भाजपा को करारी शिकस्त मिली थी। ऐसे में बतौर अध्यक्ष सुरेश कश्यप के एक्सटेंशन की राह मुश्किल दिख रही है।
जून 2020 में डॉ राजीव बिंदल के स्थान पर सुरेश कश्यप को नया अध्यक्ष बनाया गया था। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ साथ सुरेश कश्यप शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद भी है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का करीबी माना जाता है और उनकी नियुक्ति के पीछे भी ये ही बड़ा कारण माना जाता है। पर क्या अब सत्ता परिवर्तन के बाद भी कश्यप को एक्सटेंशन मिलेगा, ये देखना रोचक होगा। दरअसल बीते विधानसभा चुनाव में न सिर्फ बतौर अध्यक्ष कश्यप की परफॉरमेंस पर सवाल उठे है बल्कि उनके अपने संसदीय क्ष्रेत्र शिमला में भी भाजपा सबसे ज्यादा पिछड़ी है। शिमला संसदीय क्षेत्र की 17 में से सिर्फ तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ये ही कारण है कि कश्यप की डगर फिलवक्त मुश्किल है।
टॉप टू बॉटम संगठन मेकओवर जरूरी !
2024 लोकसभा चुनाव में 2014 और 2019 जैसा प्रदर्शन दोहराने के लिए भाजपा को निसंदेह एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना होगा। लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में शिमला नगर निगम चुनाव भी होने है। ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कार्यकाल को बढ़ाती भी है तो संगठन को मजबूत करना सुरेश कश्यप के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। माहिर मानते है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा को टॉप टू बॉटम संगठन मेकओवर की जरुरत है।
