फिर कर्ज ले रही है सरकार
प्रदेश की सुक्खू सरकार पर जन अपेक्षाओं का बोझ भी है और संसाधनों का अभाव भी। ऐसे में सिमित आय और बढ़ते व्यय के बीच प्रदेश सरकार के सामने कर्ज ही एकमात्र विकल्प है। चालु वित्त वर्ष 2022 -23 समाप्त होने से पहले राज्य सरकार अब 1700 करोड़ का ऋण लेगी। ये ऋण दो मदो में क्रमश 1000 करोड़ और 700 करोड़ रुपये ली जाएगी। 1000 करोड़ 15 वर्ष के लिए और 700 करोड़ 9 वर्ष के लिए लिए जायेंगे। विदित रहे कि वर्त्तमान सुक्खू सरकार इससे पहले भी 1500 करोड़ का ऋण ले चुकी है। मौजूदा सरकार का ऋण अब बढ़कर 3200 करोड़ हो जायेगा। वहीँ वर्तमान सरकार के अनुसार पूर्व की जयराम सरकार से उसे विरासत में करीब 75000 का करोड़ का ऋण और करीब 11000 करोड़ की देनदारियां मिली है। यानी प्रदेश की आर्थिक स्थिति दुरुस्त नहीं है। हिमाचल में प्रति व्यक्ति कर्ज करीब 93 हज़ार रुपये जा पहुंचा है, जो सुखद स्थिति नहीं है।
आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस :
उधर सुक्खू सरकार राज्य की आय बढ़ाने के लिए मिशन मोड पर कार्य कर रही है। सरकार पन विद्युत परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाने जा रही है जिससे करीब चार हज़ार करोड़ की आय बढ़ेगी। इसके अलावा नई आबकारी नीति से भी सरकार को करीब 2800 करोड़ ज्यादा राजस्व की उम्मीद है। खनन और सरप्लस बिजली बेचकर भी सरकार आय बढ़ाने पर कार्य कर रही है। वहीँ सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रमों का घाटा भी करीब पांच हज़ार करोड़ है और जानकार मान रहे है कि इस दिशा में सुक्खू सरकार जल्द अहम फैसले ले सकती है।
