भांग की खेती वैध करने की दिशा में बढ़ रही सरकार
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हिमाचल सरकार भांग की खेती को कानूनी रूप से वैधता प्रदान करने पर विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की खराब आर्थिक व्यवस्था को सुधारने के लिए राजस्व अर्जित करना है। सुक्खू सरकार का मानना है कि औषधीय और औद्योगिक क्षेत्र के लिए भांग की खेती कारगार साबित होगी। प्रदेश में भांग की खेती को वैध करने की सम्भावनाओ को तलाशने के लिए प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गठित कमेटी उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के दौरे पर है। इस दौरान दोनों राज्यों में भांग के इंडस्ट्रियल व गैर मादक उपयोग के लिए भांग की खेती शुरू करने के पहलुओं पर जहां चर्चा हुई है। कमेटी सभी पहलुओं पर अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी और सुझाव देगी कि प्रदेश में किस तरह से इसकी खेती को वैध किया जा सकता है।
विदित रहे कि भांग की खेती को वैध करने का मामला विधानसभा के बजट सत्र में खूब गूंजा। इस के पक्ष में द्रंग से विधायक पूर्ण चंद ठाकुर ने मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। उनके अलावा मुख्य संसदीय सचिव सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक हंसराज, सुरेंद्र शौरी, डॉ. जनक राज ने भी भांग के फायदे सदन में गिनाए थे। इसके बाद ही स्पीकर के कहने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की।
आर्थिक स्थिति भी होगी ठीक !
हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां किसानों द्वारा सेब उत्पादन का करोबार बड़े स्तर पर किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से सेब के कारोबार से क्षेत्रीय किसानों को खासा मुनाफा नहीं हो पा रहा है, जिसके राज्य का राजस्व प्रभावित हो रहा है और प्रदेश सरकार पर वित्तीय कर्ज भी बढ़ा है। सरकार का मानना है कि भांग की खेती को वैध करने से राज्य को सालाना 18000 करोड़ रुपए आय होने का अनुमान है, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ेगा। भांग की खेती राज्य सरकार पर बढ़ रहे वित्तीय कर्ज को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इन जिलों में होती है अवैध भांग की खेती
सरकार मानती है कि प्रदेश में बढ़ रहे नशे का चलन और नशा तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए यह निर्णय कारगार सिद्ध हो सकती है। भांग की खेती लीगल होने से भांग की अवैध खेती पूरी तरह से चौपट हो जाएगी, जिससे भांग के अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में लगभग 2400 एकड़ भूमि पर भांग की अवैध खेती हो रही है, जिसमें शिमला, सिरमौर, चंबा, कुल्लू और मंडी के कुछ क्षेत्र शामिल है।
क्या कहता है एक्ट?
भारत में भांग की खेती करना प्रतिबंधित है. 1985 में भारत सरकार ने नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज अधिनियम के तहत भांग की खेती करना प्रतिबंधित कर दिया था। मगर इसी NDPS अधिनियम के अंतर्गत राज्य सरकारों को बागवानी और औद्योगिक उद्देश्य के लिए भांग की खेती की अनुमति प्रदान करने का अधिकार देता है। एनडीपीएस अधिनियम के मुताबिक ‘केंद्र सरकार कम टीएचसी मात्रा वाली भांग की किस्मों पर अनुसंधान और परीक्षण को प्रोत्साहित कर सकती है। मगर केंद्र एक सतर्कता बरतेगा और बागवानी या औद्योगिक उद्देश्य के लिए ही भांग की खेती के सबूत आधारित अनुमति देगा और इसके अनुसंधान के नतीजों के आधार पर फैसला लेगा।
उत्तराखंड में वैध है भांग की खेती
उत्तराखंड में भांग की खेती वैध है। उत्तराखंड वर्ष 2017 में भांग की खेती को वैध करने वाला देश का पहला राज्य बना। उत्तराखंड में नियंत्रित और विनियमित तरीके से भांग की खेती की जागई है। यानी कि जिस व्यक्ति के नाम जमीन होगी, वह किसी वाणिज्यिक व औद्योगिक इकाई के साथ साझेदारी में ही भांग की खेती के लिए आवेदन कर सकता है। भांग की खेती करने के लिए किसी भी व्यक्ति को खेत विवरण, क्षेत्रफल व सामग्री भंडारण करने के परिसर की जानकारी के अलावा चरित्र प्रमाण पत्र के साथ डीएम के सामने आवेदन करना होता है। इसके अलावा लाइसेंस बनाने के लिए प्रति हेक्टेयर एक हजार रुपये का शुल्क देना होता है। एक जिले से दूसरे जिले में बीज खरीद जाने के लिए भी उपायुक्त की अनुमति की जरूरत पड़ती है। भारत में उत्तराखंड के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में भी औषधीय रूप में जरुरत अनुसार खेती की जा रही है।
WHO के मुताबिक़ भांग के कई फ़ायदे
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ यदि भांग का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाये तो भांग स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकती है। भांग आपके सीखने और याद करने की क्षमता बढ़ाती है। अगर भांग का उपयोग सीखने और याद करने के दौरान किया जाता है तो भूली हुई बातें आसानी से याद की जा सकती है। भांग का इस्तेमाल कई मानसिक बीमारियों में भी की जाती है. जिन्हें एकाग्रता की कमी होती है, उन्हें डॉक्टर इसके सही मात्रा के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
पहले करेंगे चर्चा, फिर लेंगे फैंसला
नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत राज्यों को औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को साधारण और विशेष आदेशों के तहत अनुमति देने का अधिकार दिया गया है। इस एक्ट के तहत राज्य सरकारें भांग की खेती के लिए कानून औषधीय क्षेत्र के लिए भांग की खेती के लिए नियम निर्धारित करती है। इन नियमों की पालन करते हुए औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की जा सकती है। वर्तमान में कई राज्य कानूनी नियमों का पालन करते हुए भांग की खेती कर रहे है, जिनमें गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्य शामिल है। सरकार अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करेगी और भांग की खेती को वैध बनाने वाले अन्य राज्यों द्वारा अपनाए गए मॉडल का अध्ययन करेगी ताकि भविष्य में कोई परेशानी ना हो।फिलहाल कमेटी की रिपोर्ट का इंतज़ार है इसके बाद ही निर्णय लिया जायेगा।
-सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश
