बागवान तल्ख पर सरकार का रवैया सकारात्मक
हिमाचल प्रदेश के बागवान सुक्खू सरकार से खफा खफा दिख रहे है। सरकार को चार माह भी नहीं हुए और यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए संयुक्त किसान मंच ने सात दिन के भीतर सरकार को विधानसभा सत्र में विधेयक लाने का अल्टीमेटम दे दिया है। ऐसा न होने की स्थिति में एक बार फिर आंदोलन पर उतरने की चेतावनी भी दी गई है। बागवानों ने सरकार से मांग की कि, इसी विधानसभा सत्र में यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए विशेष कानून बनाया जाए।
बागवानों का मानना है, बीते कई दिनों से प्रदेश सरकार का बजट सत्र चल रहा है, लेकिन बागवानों के मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है। बागवानी मंत्री सत्र से पहले यूनिवर्सल कार्टन लागू करने को लेकर मुखर थे, लेकिन सत्र में अब तक यूनिवर्सल कार्टन पर कोई चर्चा नहीं हुई। अगर इस बाबत विधेयक लाकर कानून नहीं बनाया गया तो किसानों-बागवानों को लामबंद कर आंदोलन खड़ा किया जाएगा। हालांकि इस पर मुख्यमंत्री ने ब्यान जारी कर कहा है कि बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और प्रदेश सरकार यूनिवर्सल कार्टन लागू करने के लिए कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सीए स्टोर स्थापित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं, ताकि बागवानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके और उन्हें बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। इसके अलावा सेब आधारित डिस्टिलरी स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि बागवान कम गुणवत्ता वाले सेबों को भी बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। यानी बागवान तल्ख़ जरुरी है, लेकिन सरकार उन्हें आश्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। बहरहाल, आगामी कुछ वक्त में ये तय होगा कि क्या बागवान सरकार को सेटल होने का वक्त देते है या नहीं। यहाँ ये भी जहन में रखना होगा कि लोकसभा चुनाव को करीब एक वर्ष का वक्त है और प्रदेश की दो संसदीय सीटों, शिमला और मंडी में बागवानों का वोट निर्णायक सिद्ध हो सकता है। जाहिर है ऐसे में सरकार भी बागवानों को साधे रखना चाहेगी।
समझे : टेलीस्कोपिक से कैसे अलग यूनिवर्सल कार्टन
यूनिवर्सल कार्टन में सिर्फ 20 किलो सेब ही भरा जा सकेगा, जबकि टेलीस्कोपिक में बागवान 25 से 40 किलो तक सेब भरते हैं। इतना सेब भरने के बावजूद भी बागवानों को दाम औसत 20 से 25 किलो के हिसाब से ही दिए जाते हैं। इस तरह प्रति पेटी बागवान 5 से 15 किलो अतिरिक्त सेब दे रहे हैं। इस लिहाज से बागवानों को प्रति पेटी कई बार 200 से 700 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका फायदा लदानी उठा जाते हैं, जो हिमाचल में खरीदे गए सेब को देश के बाजारों में किलो के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। अगर यूनिवर्सल कार्टन लागू किया जाता है तो बागवान किलो के हिसाब से ही एक पेटी में सेब भरेंगे।
यह है सेब पैकिंग का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड
दुनियाभर में सेब 4 लेयर में भरा जाता है। यह सेब पैकिंग का अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड है। दुनिया के किसी भी मुल्क से भारत में सेब आयात किया जाता है तो भी किलो के हिसाब से खरीदा जाता है, लेकिन हिमाचल में बागवान टेलीस्कोपिक कार्टन में 6 से 8 तह में सेब भर रहे हैं। कुछ बागवान ऐसा कमीशन एजेंट के दबाव में आकर तो कुछ सबसे महंगा सेब बेचने की चाहत में कर रहे हैं।
वीरभद्र सरकार 2 बार लाई थी विधेयक
पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार ने भी यूनिवर्सल कार्टन को लेकर 2 बार विधेयक पेश किया, लेकिन बिना तैयारियों के लाया गया विधेयक बागवानों के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। उस दौरान यूनिवर्सल कार्टन तो अनिवार्य कर दिया गया, मगर बाजार में इसकी उपलब्धता नहीं कराई गई। कार्टन बनाने वाली कंपनियों से पहले संपर्क नहीं साधा गया। हालांकि यूनिवर्सल कार्टन इस्तेमाल न करने वाले बागवानों को पेनल्टी लगाने इत्यादि का प्रावधान अध्यादेश में कर लिया गया था। तब यूनिवर्सल कार्टन के साइज इत्यादि तैयार करने पर पूर्व सरकार ने तकरीबन 11 लाख रुपए खर्च किए थे।
