राहुल अयोग्य : देखें, आगे क्या होता है !
देश की सबसे बुज़ुर्ग पार्टी कांग्रेस का बुरा दौर और बुरा होता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता या सीधे तौर पर कहें तो पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा, राहुल गांधी पूरी तरह घिर गए है। चार साल पुराने एक आपराधिक मानहानि में दो साल की सज़ा मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई। यही नहीं वर्तमान कानून के मुताबिक, राहुल गाँधी फिलहाल 2024 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे, हालांकि अगर ऊपरी अदालत से पूर्व कांग्रेस सांसद को राहत मिलती है तो यह स्थितियां बदल सकती हैं। मानहानि के जिस मामले में राहुल को सजा सुनाई गई, भाजपा उसे समग्र ओबीसी जाति का अपमान बता रही है। ये बात और है कि जिन नीरव मोदी का राहुल ने नाम लिया था, वे जैन हैं और ललित मोदी मारवाड़ी। वहीँ कांग्रेस इस पूरे मामले को साज़िश बता रही है, जबकि फ़ैसला कोर्ट का है दरअसल कोर्ट के द्वारा दो या दो साल से ज़्यादा की सजा मिलने के बाद जनप्रतिनिधित्व क़ानून के तहत सदस्यता समाप्त होना लाजमी है। हाँ, एक बात ज़रूर है कि राहुल गांधी की सदस्यता रद्द होने से पूरी कांग्रेस में भूचाल आ गया है। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि देश के लड़खड़ाते विपक्ष के लिए भी ये एक बड़ा झटका है। अब कांग्रेस की राजनीतिक विरासत को सँभालते गाँधी परिवार पर सुलगी आग के इस ताप से कांग्रेस पिघलती है या तप कर और निखरती है, फिलवक्त ये सबसे बड़ा सवाल है। सवाल ये भी है कि 2024 से पहले विपक्षी दलों के होने की संभावना पर अब क्या असर होगा ?
इस वक्त भारतीय राजनीति के प्लेटफ़ॉर्म पर विपक्ष के लिए काली रात खड़ी दिखाई दे रही है। लगातार मज़बूत होती भारतीय जनता पार्टी के आगे मानो विपक्ष हांफने लगा हो। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की लोकसभा सीट वायनाड में उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अगर राहुल के पक्ष में फैसला आने से पहले उपचुनाव हो गया तो फिर उनका संसद में आना मुश्किल हो जाएगा। दो साल की सजा का समय और उसके बाद छह साल की अयोग्यता तक वे कोई चुनाव नहीं लड़ पाएँगे। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस की स्थिति और बदतर होगी।
हालांकि कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना ये भी है कि ये राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा अवसर है, जिसमें वे दुगनी- चौगुनी ताकत के साथ फिर सामने आ सकते हैं। एक वर्ग विशेह में कहीं न कहीं ये राय बन रही है यह फैसला लोकतंत्र के खिलाफ है और विरोधी दलों के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस मुद्दे को आंदोलन में बदला जा सकता है, जमीन से आवाज उठाकर आंदोलन को ईवीएम तक ले जाया जा सकता है। वैसे कांग्रेस के साथ कई बुनियादी समस्याएं है। कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, अडानी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठा रही है और उन्हें लोगों से प्रतिक्रिया मिल रही है, लेकिन कांग्रेस उस गति को बरकरार नहीं रख पाती। कांग्रेस उस आंदोलन को जिंदा नही रख पाती जो उसके सत्ता के रास्ते की दूरी कम कर सकता है। अब फिर कांग्रेस के पास एक मौका है।
अतीत में झांके तो कांग्रेस ऐसी पार्टी भी रही है जो जन आंदोलन या जन भावनाओं के सैलाब पर सवार होकर सत्ता में आ जाए। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ऐसा ही माहौल बना था और राजीव गांधी 400 से ज़्यादा सीटें लेकर जीते थे। मगर फिलवक्त कांग्रेस ऐसा जनसैलाब पैदा कर पाए, ये मुश्किल जरूर लगता है। वहीँ कुछ का मानना ये भी है यह कांग्रेस के लिए चेहरा बदलने का एक बढ़िया अवसर भी है। भाजपा के 'यश' में हमेशा राहुल गांधी का 'अपयश' एक हिस्सा रहा है। इसलिए अगर कांग्रेस सोच-समझकर आगे जाती है और नया चेहरा सामने लाती है, तो भाजपा के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी के साथ हुई यह कार्रवाई गांधी परिवार के साथ ऐसा पहला मामला नहीं है। इससे पहले साल 1978 में राहुल की दादी इंदिरा गांधी ने सदस्यता गंवाई थी और साल 2006 में उनकी मां सोनिया गांधी ने भी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दिया था। हालांकि इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी ने उपचुनाव में जीत हासिल करके सदन में एंट्री ले ली थी।
ये है पूरा मामला :
साल 2019 का ये मामला 'मोदी सरनेम' को लेकर राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने नीरव मोदी, ललित मोदी और अन्य का नाम लेते हुए कहा था, "कैसे सभी चोरों का सरनेम मोदी है?" राहुल गांधी को जिस बयान के लिए दो साल की सज़ा हुई है वो उन्होंने साल 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान कर्नाटक के कोलार में दिया था। उन्होंने कथित तौर पर ये कहा था, "इन सभी चोरों का उपनाम (सरनेम) मोदी क्यों है?" राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ बीजेपी नेता पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। पूर्णेश मोदी सूरत पश्चिमी से बीजेपी विधायक हैं और पेशे से वकील हैं। वह भूपेंद्र पटेल की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। पूर्णेश मोदी का आरोप था कि राहुल गांधी की इस टिप्पणी से पूरे मोदी समुदाय की मानहानि की है। इस मामले की सुनवाई सूरत की अदालत में हुई। राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया था। भारतीय दंड विधान की धारा 499 में आपराधिक मानहानि के मामलों में अधिकतम दो साल की सज़ा का प्रावधान है।
क्यों गई राहुल गांधी की सदस्यता
अनुच्छेद 102(1) और 191(1) के अनुसार अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य, लाभ के किसी पद को लेता है, दिमाग़ी रूप से अस्वस्थ है, दिवालिया है या फिर वैध भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी सदस्यता रद्द हो जाएगी। अयोग्यता का दूसरा नियम संविधान की दसवीं अनुसूची में है। इसमें दल-बदल के आधार पर सदस्यों को अयोग्य ठहराए जाने के प्रावधान हैं। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत किसी सांसद या विधायक की सदस्यता जा सकती है। इस कानून के जरिए आपराधिक मामलों में सजा पाने वाले सांसद या विधायक की सदस्यता को रद्द करने का प्रावधान है।
