व्यवस्था चौपट और अव्यवस्था हावी : हंसराज
स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी ने कहा था कि कांग्रेस सरकार को यदि किसी एक व्यक्ति के लिए भी डिवीज़न खोलना पड़ा तो हम खोलेंगे। साथ उन्होंने एक बात और भी कही थी कि प्राइमरी स्कूल तो बहुत जरूरी है, यदि एक बच्चे के लिए भी प्राइमरी स्कूल खोलना पड़ा तो खोलेंगे। वीरभद्र सिंह का मॉडल तो ऐसा था आज़ादी के बाद जब से कांग्रेस सत्ता में आई चम्बा पिछड़ता गया। जो भी खामियाज़ा चम्बा के लोगों ने भुगता है, उसका कारण कांग्रेस है
चुराह विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज उन नेताओं में से है जो हमेशा चर्चा में रहते है। अपनी आक्रामक कार्यशैली और बेबाक बयानों से हंसराज सुर्ख़ियों में भी रहते है और विरोधियों को घेरने में आगे भी। बेशक प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ हो लेकिन चुराह में हंसराज का राज जारी है। प्रदेश की सुक्खू सरकार को तीन माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और नई सरकार का पहला बजट भी आ चुका है। नई सरकार के अब तक के कामकाज और विपक्ष की भूमिका सहित कई मसलों पर फर्स्ट वर्डिक्ट ने हंसराज से विशेष बातचीत की। हंसराज ने डी नोटिफाई के मुद्दे पर वीरभद्र सिंह मॉडल का हवाल देकर सरकार को आईना दिखाया और जनमंच के पक्ष में भी मजबूती से अपनी बात रखी। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंश
सवाल : हंस राज जी कांग्रेस सरकार ने अपना बजट पेश किया है। इस बजट को लेकर क्या संक्षिप्त में क्या कहना चाहेंगे ?
जवाब : कांग्रेस अपने बजट को कह रही है कि यह व्यवस्था है, लेकिन यह सम्पूर्ण रूप से अव्यवस्था है।
सवाल : डिनोटिफिकेशन किए गए संस्थानों की बात आपने सदन में रखी थी। आपके क्षेत्र में कई विद्युत सब डिवीज़न और कई संस्थानों को बंद किया गया है। आप लगातार यह कह रहे है कि यदि सरकार ने इन संस्थानों को सुचारु रूप से नहीं चलाया तो आप आमरण अनशन करेंगे। क्या कहना चाहेंगे आप ?
सवाल : देखिए हमने अपने सारे विषय रख दिए है और एक विषय में हमारी जीत भी हुई है। विधायक निधि को लेकर जो बिलकुल ही मुकरे हुए थे, उन्होंने बजट में कह दिया कि हम इसको दस लाख बढ़ा भी देंगे। अब रही संस्थानों की बात तो हमने अभिभाषण में चर्चा में भाग लेते हुई कहा था कि चाहे विद्युत सब डिवीज़न की बात हो, कॉलेज या अन्य संस्थान, जनहित में बंद नहीं होने चाहिए और हम इन्हे खुलवाकर मानेंगे। सदन में मैंने स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस सरकार को यदि किसी एक व्यक्ति के लिए भी डिवीज़न खोलना पड़ा तो हम खोलेंगे। साथ उन्होंने एक बात और भी कही थी कि प्राइमरी स्कूल तो बहुत जरूरी है, यदि एक बच्चे के लिए भी प्राइमरी स्कूल खोलना पड़ा तो खोलेंगे। वीरभद्र सिंह का मॉडल तो ऐसा था।
उन्होंने डलहौजी में एक ही नोफिकशन में दो कॉलेज खोले थे और अब उस विधानसभा क्षेत्र में चार कॉलेज है और हमारे विधानसभा क्षेत्र में एक ही कॉलेज है। क्षेत्रफल के लिहाज से देखा जाए तो लाहौल स्पीति, भरमौर, पांगी के बाद चुराह सबसे बड़ा विधानसभा क्षेत्र है और एक तरफ जम्मू और लाहौल स्पीति की साथ लगता है और दूसरी साइड पंजाब पठानकोट से लगता है। हमने कहा कि जो बेसिक चीज़े चाहिए वो चुराह को मिले। आजादी के 76 सालो में लगभग 55 से 60 से तक कांग्रेस ने हिमाचल में राज़ किया है और यदि आज चुराह विधानसभा पिछड़ा रह गया है तो उसका कारण कांग्रेस सरकार है। अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस क्षेत्र को उठाने की कोशिश की है तो कांग्रेस के पेट में क्यों दर्द हो रही है।
सवाल : जनजातीय क्षेत्रों जैसे चम्बा या लाहौल स्पीति के लिए विशेष पैकेज की बात भी आपने की। पांच साल हिमाचल में भी और केंद्र में भी भाजपा की सरकार रही है, उस समय इन इलाकों के लिए यह पैकेज क्यों नहीं लाए गए।
जवाब : हिंदुस्तान आज़ाद होने से पहले कोलकाता में लाइट होती और चम्बा में लाइट होती थी। हमारे राजा लोग इतने प्रबुद्ध और एडवांस सोच के थे। हिंदुस्तान जब आज़ाद हुआ तो अन्य राज्यों की मांग होने लगी। डॉ वाईएस परमार और उनके साथियो की मेहनत से आज हम हिमाचल में है, वरना हमे तो पंजाब में डाला जा रहा था। हमने हिमाचल में रहने की वकालत की और जिन जिलों ने हिमाचल का निर्माण किया है उन जिलों में सबसे पहला जिला चम्बा था। आज पाकिस्तान में जो लाहौर है, हमसे हमसे नज़दीक था। उस दौर में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे लोग चम्बा में थे। फिर आज़ादी के बाद जब से कांग्रेस सत्ता में आई चम्बा पिछड़ता गया। जो भी खामियाज़ा चम्बा के लोगों ने भुगता है, उसका कारण कांग्रेस है।
सवाल : आप सवाल को घुमा गए हंसराज जी। चलिए अगले सवाल पर आते है। भाजपा बार-बार यह कह रही है की जो कांग्रेस ग्रीन एनर्जी की पहल अपने बजट में लाई है वो पूरा केंद्र सरकार से कॉपी पेस्ट किया गया है। पर कांग्रेस का यह कहना है कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी तब इस प्रोजेक्ट को क्यों नहीं लाया गया, उस समय भाजपा कहाँ सोई हुई थी।
जवाब : आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी में पूरे देश को ग्रीन कहा है, तो उसमें हिमाचल भी आता है। इसमें कहाँ एक्स्ट्रा करने की जरूरत है। उसमे फंडिंग की भी व्यवस्था की गई है। ये लोग भूल गए है कि प्रोफ़ेसर प्रेम कुमार धूमल जी जब सीएम थे तब प्लाटिक उन्होंने ही बैन किया था। ग्रीन सैस की अगर बात की जाए तो वह प्रेम कुमार धूमल जी के टाइम से ही शुरू कर दिया गया था, इनको कुछ नया नहीं करना है। हम लोग तो पहले से ही ग्रीन थे। बल्कि जैसा रणधीर जी ने सदन में अपने वक्तव्य में कहा कि यहाँ लकड़ी चोर भी हुई है, इसके चलते भी तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री बदले गए। ये है कांग्रेस का असली चेहरा।
सवाल : बजट सत्र में जनमंच को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस कह रही है कि यह लंच मंच है और एक मंत्री ने यह भी कहा कि झंड मंच भी है।इसको लेकर आपका क्या कहना है।
जवाब : जनमंच एक बेहतरीन व्यवस्था थी। प्रदेश में जब भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तो लोगों के प्रति उत्तरदायी सरकार रही है। हम वह पहले लोग हैं जो सरकार बनने के बाद सीधा जनता के पास जाकर उनकी समस्याओं को सुनते हैं कि कैसे समस्या का हल किया जाए। इनको जनमंच का परिभाषा नहीं पता है। मैं शुरू से देखता आया हूं कि यह लोग टाइम पास करते हैं। पांचवे साल इनको याद आता है कि कुछ करना है। चुनावी महीनों में ज्यादा चलते है ये लोग। मैंने खुद 17 जनमंच होस्ट किए है, सिरमौर से लेकर किन्नौर तक गया हूँ। जनमंच से लाखों मुद्दे हल हुए है और तो क्या बुरा होता था। इस पर खर्च हुआ पांच सालों में सिर्फ पांच करोड़। लाखों जनसमस्याएं हल हुई है सरकार जनता के दर पर गई है, बताइये इसमें क्या हर्ज था।
