निजी बस ऑपरेटर्स ने दी अनिश्चितकालीन संघर्ष पर उतरने की चेतावनी
निजी बस ऑपरेटरों ने दो टूक शब्दों में सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दस दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों को नहीं माना गया तो वे अनिष्चित कालीन संघर्ष की राह पर निकल जाएंगे जिसकी सारी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार और प्रशासन की होगी। इसी आाशय को लेकर मंगलवार को करीब साठ निजी बस आपरेटरों ने एसी टू डीसी सिद्धार्थ आचार्य के माध्यम से प्रदेश मुख्यमंत्री को ज्ञापनप्रेषित किया।
निजी बस आपरेटरों में शामिल अनिल कुमार मिंटू, अमरजीत सिंह सेन, हरीश, रमेश ठाकुर, अभिषेक, अजय भंडारी, देवराज, रवि कुमार, युवराज डटवालिया, सुनील कुमार, मेहरचंद, चुन्नीलाल, रतनलाल, विनय पुरी, नवल किशोर, राजेश धीमान, बंटी, राजू, विनीत, गुलजार आदि ने बताया कि अब हालात बहुत बिगड़ चुके हैं तथा वे अपनी खड़ी हुई बसों की चाबियां और कागजात प्रशासन को सौंपने के लिए आए थे लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उनके यह दस्तावेज आदि लेने से मना कर दिया।
उन्होंने बताया कि उनकी बसें खड़ी है जिस कारण उनकी परेशानियों में भी इजाफा हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हालांकि इन बसों को चलाने के लिए सशर्त कवायद भी शुरू की लेकिन कोरोना के भय से निजी बसों को न तो सड़कों पर सवारियां मिल रही है और न ही उचित किराया। ऐसे में निजी बस ऑपरेटर अपना और अपने परिवार का पेट पालने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। ऑपरेटरों ने बताया कि जब लॉकडाउन शुरू हुआ था तो देश प्रदेश और समाज के हित में सभी निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी अपनी गाड़ियां रोक दी थी। उन्होंने बताया कि यह गाड़ियों उन्होंने स्वरोजगार के तहत अपने परिवार को रोजी-रोटी चलाने के लिए बैंकों से भारी भरकम कर्ज लेकर डाली थी इसमें कई चालक और परिचालक अपनी सेवाएं दे रहे थे जो अब बेरोजगार हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर बैंकों की किस्तों के ब्याज में इजाफा निरंतर बढ़ रहा है।
ऑपरेटरों ने अपनी मांगों को जिक्र करते हुए बताया कि एक तरफ सरकार औद्योगिक घरानों, मजदूरों और तमाम दूसरे तबकों को राहत देने के लिए विभिन्न प्रकार के पैकेज दे रही है किंतु निजी बस ऑपरेटरों को सरकार द्वारा किसी प्रकार की कोई राहत प्रदान नहीं की गई है। इसलिए ऑपरेटरों ने बसें चलाने से अपने हाथ खड़े कर दिए हैं मांगों का जिक्र करते हुए निजी बस ऑपरेटरों ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को वापस ले, तमाम निजी बस ऑपरेटर लॉक डाउन की अवधि के दौरान आर्थिक राहत पैकेज दिया जाए। सभी प्रकार के कर, पासिंग चार्जेस अगले वर्ष तक माफ किया जाए, इंश्योरेंस का लॉक डाउन की अवधि बढ़ाई जाए और अगले इंश्योरेंस का सारा पैसा इंश्योरेंस कंपनी को सरकार अदा करें। बसों में सोशल डिस्टेंसिंग की शर्तों को हटाया जाए, लॉक डाउन अवधि का बैंक ब्याज और किस तथा अगले 1 वर्ष का ब्याज माफ किया जाए, निजी बस ऑपरेटरों का स्टॉप चालक परिचालक आदि को आर्थिक पैकेज तथा तमाम स्टाफ का 50 लाख रुपए का बीमा सरकार की तरफ से किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार 10 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर अमल नहीं करती है तो तमाम निजी बस ऑपरेटर संघर्ष की राह पर चलने के लिए बाध्य होंगे जिसकी पूरी जिम्मेवारी सरकार और प्रशासन की होगी।
इस प्रतिनिधिमंडल में अनिल कुमार मिंटू, रमेश ठाकुर, मोहम्मद रफी, विनीत, संजय, रमेश चंद, अशोक, केहर सिंह, मेहर चंद, रवि कुमार, राजेश कुमार, बंटी, अनिल, रश्मि देवी, नवल किशोर, रामपाल, जीवन सिंह, माया देवी, मंजू बाला, प्रेमलता, गौरव सेन, अमरजीत सेन, शरीफ मोहम्मद, शशि सेन जगदीश कुमार सहित करीब 68 लोग मौजूद थे।
