लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के दौर में बस किरायों में वृद्धि का फैसला गलत : अंजना धीमान
हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा की गई 25 प्रतिशत किराए में वृद्धि की जिला कांग्रेस कमेटी निंदा करती है और इसे प्रदेश सरकार का जन विरोधी फैसला करार देती है। यह बात बिलासपुर में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा किए गए प्रदर्शन के उपरांत जिला प्रधान अंजना धीमान ने कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जहाँ पहले ही डीजल- पेट्रोल की कीमतों ने लोंगो का जीना दूभर कर रखा है उसके ऊपर से गाड़ियों की इंश्योरेंस की कीमतें दुगनी ही चुकी है, नई गाड़ियों का पंजीकरण करवाना पहले से ही महंगा है ऊपर से इस लॉक डाउन और आर्थिक मंदी के दौर में बस किरायों में कई गई वृद्धि एक बहुत ही गलत फैसला है। इस मौके पर पूर्व विधायक बीरू राम गौतम, तिलक राज शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता तेजस्वी शर्मा, हेम राज ठाकुर, संदीप सांख्यान, कर्ण चंदेल, विवेक कुमार, ज्ञान चंद गंभीर, कैप्टन ओम प्रकाश चंदेल ब्लॉक कांग्रेस झंडूता के अध्यक्ष सतीश चंदेल, बलदेव ठाकुर, गोपाल कृष्ण शर्मा, अमरजीत, रोहित गौतम, गौरव शर्मा, अंकुश ठाकुर, रशपाल, मजीद खान, आशीष ठाकुर, बिमला सहगल, अमित शर्मा, अनुराग पंडित, विजय ठाकुर, सूबेदार सीता राम, पारस गौतम भी उपस्थित रहे।
इन कांग्रेसी नेताओं का कहना था कि प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद जिला बिलासपुर व राज्य की जनता पर अब और आर्थिक बोझ पड़ चुका है। यह उत्तरी भारत के राज्यों में होने वाली अभी तक की सबसे बड़ी पुब्लिक ट्रांसपोर्ट किराए में वृद्धि है। एक तरह तो प्रदेश सरकार ने सरकारी व निजी ऑपरेटर बसों को 100 फीसदी सवारियां बिठाने को मंजूरी दे दी थी तो अब इस तरह से 25 प्रतिशत की वृद्धि करना एक अनुचित फैसला है। राज्य में इस समय साधारण बसों का किराया मैदानी इलाकों में प्रति किमी 1.12 रुपये और पहाड़ियों में 1.75 रुपये है। इसी तरह, मैदानी इलाकों में डीलक्स बसों का किराया 1.37 रुपये प्रति किमी और पहाड़ी इलाके में 2.17 रुपये प्रति किमी है। वोल्वो और वातानुकूलित बसों के लिए, मैदानों में किराया 2.74 रुपये प्रति किमी और पहाड़ी इलाके में 3.62 रुपये है। वहीं न्यूनतम बस का किराया पांच रुपये था जो कि अब 7 रुपये कर दिया गया है जबकि प्रदेश में बसों का किराया मैदानी इलाकों की वनस्पति कम होना चाहिए क्योंकि यहां पर आर्थिक तौर पर किसान वर्ग रहता है और उनकी आर्थिकी मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की अपेक्षा कम होती है क्योंकि हिमाचल जैसे राज्य की अर्थव्यवस्था खेतीबाड़ी पर ज्यादा निर्भर होती है और मैदानी क्षेत्रों के लोगो की अर्थ व्यवस्था उद्योगों पर ज्यादा निर्भर करती है, तो ऐसे में यह अनावश्यक बस किराए वृद्धि प्रदेश की जनता के लिए ठीक नहीं है। प्रदेश के पड़ोसी राज्य जहां बसों के किराये घटाए जा रहें है वहीं पर हिमाचल प्रदेश में बसों के किराए बढ़ाये जा रहे है यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण पूर्ण हैं।
