व्यापक आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे प्रदेश सरकार : रामलाल ठाकुर
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री व विधायक श्री नयना देवी जी विधानसभा क्षेत्र ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर को सचेत करते हुए कहा है कि जो 5 जून को केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े एक पुराने कानून में संशोधन किया है और दो नए अध्यादेश पारित किए हैं। अगर उनको हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों पर लागू करने की कोशिश की तो कांग्रेस पार्टी उसका विरोध करेगी।
ठाकुर ने प्रदेश सरकार को चेताते हुए कहा कि इस तरह के अध्यादेशों व कानूनों से प्रदेश के किसानों और बागवानों को दूर रखा जाना चाहिए इसके एवज में किसानों व बागवानों को अधिक सुविधाएं देनी चाहिए न कि ब्रिटिश समय के भारत जैसे काले कानून बनाने चाहिए और हिमाचल प्रदेश का किसान व बागवान कम जोत होने पर भी बहुत मेहनती है उनकी इस मेहनत को ऐसे तुगलकी फरमानों के सामने झोकना ठीक नहीं होगा नहीं तो एक व्यापक आंदोलन का सामना करने के लिए भी प्रदेश सरकार तैयार रहे। उन्होंने कहा कि उन दोनों अध्यादेशों से किसानों को नुकसान ज्यादा होगा और निजी क्षेत्र की खेती में लगी कंपनियों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी 2016 को बरेली की एक किसान रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा था कि साल 2022 में जब देश स्वतंत्रता की 75वीं सालगिरह मनाएगा, उस समय तक उनकी आय दोगुनी हो चुकी होगी। बीते फरवरी को इस घोषणा के चार साल हो गए, लेकिन अभी तक इसका कोई सटीक आकलन नहीं हुआ है कि किसानों की आय कितनी बढ़ी। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारें देश और प्रदेश में किसानों और बागवानों को झूठे सब्ज बाग दिखा रही है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि योजनाओं और कानूनों के इस मकड़जाल को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने 5 जून को एक पुराने कानून (आवश्यक वस्तु अधिनियम) में संशोधन सहित दो नए कानूनों "फार्मर एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन एग्रीमेंट ऑन प्राइस एश्युरेंस एंड फार्म सर्विसेज आर्डिनेंस (एफएपीएएफएस 2020)” और "द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स प्रमोशन एंड फेसिलिएशन (एफपीटीसी2020)" को अध्यादेश के जरिए लागू किया है। और अगर इन कानूनों का ढंग से अध्ययन किया जाए तो साफ लगता है कि इससे किसानों व बागवानों को फायदा नहीं हो पायेगा लेकिन उन कंपनियों को फायदा हो जाएगा जो इनकी खड़ी फ़सलों को यह कम्पनियां खरीदती है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि देशभर के किसान संगठन, मंडी समितियों में काम करने वाले छोटे व्यापारी और कर्मचारी इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश में भी इन कानूनों का विरोध होगा। राम लाल ठाकुर का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था में 58 प्रतिशत योगदान देने वाले किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए सरकार अध्यादेश के जरिए कानून बना रही है उसको हिमाचल प्रदेश में लागू नही किया जाना चाहिये और सरकार जिसे किसानों की मुक्ति का मार्ग बता रही है दरअसल वही उनके लिए सबसे बड़ा बंधन बनने जा रहे हैं। राम लाल ठाकुर ने कहा कि “सरकार ने कानून के जरिए पूरी कृषि का निजीकरण किया है। कृषि सुधारों और किसानों की आय बढ़ाने के नाम पर सरकार पूरी कृषि व्यवस्था को एग्रो-बिजनेस से जुड़ी बड़ी कंपनियों के हवाले करने जा रही है और यह विषय काफी चिंताजनक है।
राम लाल ठाकुर ने कहा कि पिछले करीब 29 वर्षों में 3.5 लाख किसान खुदकुशी कर चुके हैं। ठाकुर ने कहा कि भारत में एग्रो-बिजनेस से जुड़ी कई देशी-विदेशी कंपनियां दशकों से इसकी मांग कर रही थीं, जिसे विरोधों के चलते कभी लागू नहीं किया गया है हालांकि कई राज्यों ने इसको प्रायोगिक तौर पर मंजूरी भी दे दी थी जबकि कोरोना महामारी के कारण पूरा देश बंद है, बाहर आने-जाने तक पर पाबंदी है, विरोध प्रदर्शन तो दूर की बात है तो ऐसे में अध्यादेश के जरिए उन कानूनों को बनाना जिनका दशकों से विरोध हो रहा है, सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
