एसीसी प्रबंधन वर्ग कर रहा है ठेका श्रमिक नियम का उल्लंघन : शिव राम सांख्यान
एसीसी प्रबंधन वर्ग ठेका श्रमिक नियम व उन्मूलन अधिनियम 1970 का उलंघन करने के साथ साथ अपनी कम्पनी लफार्ज होलसियम के द्वारा बनाए गये स्वास्थ्य/सुरक्षा नियम तथा जॉब सेफ्टी एनैलाइजिज/सेफ औपरेटिंग प्रोसिजर का उल्लँघन कर रहा है। यह आरोप वुधवार को दी गागल सीमेन्ट काँटरैक्टर वर्कर यूनियन बरमाणा के अध्यक्ष शिवराम साँख्यान ने लगाते हुए कहा कि ठेकेदारोँ को विशेष कार्य के लिए केन्द्रीय श्रम विभाग की ओर से एसीसी की सिफारिश पर लाइसेंस प्रदान किये गए हैं और उसी आधार पर कम्पनी ने ठेकेदारों को वर्क ओडर इशू करते हैं परन्तु प्रबंधन वर्ग सभी कानून व नियमो पर ताक पर रख कर ठेका श्रमिकों को अलग अलग किसी भी प्रकार के जोखिम भरे कार्य पर टराँसफर करके ठेका श्रमिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहा है जोकि सरासर गलत है।
उन्होंने बताया कि पैकिंग व लोडिँग के लिए दो ठेकेदारो का 25-30 वर्षो से लाइसेंसी ठेका चल रहा है। परन्तु मैनेजमेंट कानून को ताक पर रखकर वहाँ पर अन्य कई ठेकेदारों के श्रमिकों को जिन्होंने कभी ये काम नहीं किया है और लाईसेंस और वर्क आर्डर भी दूसरे काम का है वहाँ पर ट्रांसफर कर रहा है। गैस्ट हाउस व कैंटीन के श्रमिक जो 25 वर्षोँ से कैटरिँग का कार्य उद्योग से बाहर करते थे उनसे पिछले लगभग एक वर्ष से उधोग का जोखिम भरा कार्य करवाया जा रहा है। अन्य ठेका श्रमिकों को भी ऐसे कई कार्य पर कानून व नियमों को ताक पर रख कर टराँसफर किए जा रहे है जबकि कम्पनी के सुरक्षा नियम अनुसार नए कार्य पर नियुक्त किए जा रहे श्रमिक को उस कार्य का कम से कम 4 साल का अनुभव होना जरुरी है। सुरक्षा नियम के उल्लंघन करने वाले श्रमिक की नौकरी तक जा सकती है। ये नियमों का उल्लंघन है जो बाद मे श्रमिक पर ही थोपा जाएगा। शिव राम संख्यान ने बताया कि एसीसी में ठेका श्रमिकों की संख्या कम हो गई है जिस कारण से प्रत्येक ठेका श्रमिक पर वर्क लोड बढ गया है तथा प्रबंधन वर्ग नयी भर्ती करने के बजाए श्रमिकों को कानून/नियमो को ताक पर रखकर उनका नेचर आफ जौब बदल कर जान जोखिम डाल रहा है और 1-1 मजदुर पर 3-3 मजदूरो का काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। शिव राम संख्यान से जिला प्रशासन से मांग की है कि वह मजदूरो की सुरक्षा वा कानून को ध्यान में रखते हुए खुद इस उद्योग में व्यवस्थाओ की जांच करे और इस संधर्भ में उचित कार्यवाही करे।
