संदीप सांख्यान ने चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
जिला कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता व महासचिव, व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के समन्वयक संदीप सांख्यान ने कोविड 19 जैसी महामारी के चलते चिकित्सा विभाग की कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े किए है। उन्होंने कहा कि यह मामला उन की ग्राम पंचायत से सम्बंधित है। जिला मुख्यालय बिलासपुर के साथ लगती ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के वार्ड नं. 4 और 7 कन्टेनमेंट जोन घोषित किये गए है जबकि वार्ड नं. 2,3 और 5 बफर जोन घोषित किए गए हैं। यह अधिसूचना प्रशासन की तरफ से 27 जुलाई को जारी की गई थी। ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के वार्ड नं. 4 में जो कोविड 19 पॉजिटिव व्यक्ति आया था उसको 27 तारीख को नेरचौक स्थित कोविड अस्पताल में ले जाया गया था लेकिन उनके परिजनों का कहना है कि जब से उनके घर के सदस्य को कोविड 19 पोजीटिव घोषित किया है तब से जिला बिलासपुर के मेडिकल विभाग का रवैया उदासीन बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि उनके घरों में डर और दुविधा का मौहाल बना है न तो जिला के चिकित्सा विभाग की तरफ से कोई ठीक जानकारी दी जा रही है और न ही कोई ठीक से कोई गाइडेंस दी जा रही है। चिकित्सा विभाग के कर्मचारी घर आकर यह कहते रहें है कि आपकी भी कोविड 19 की सैंपलिंग 5 दिन के बाद होगी लेकिन 6 दिन हो गए अब आगे कब होगी इसके बारे में कोई ठीक से जानकारी नहीं दी जा रही है। जो व्यक्ति कोविड 19 पोसिटिव आया है वह अपने रूटीन चेकअप के लिए पी जी आई चंडीगढ़ वहाँ से मिली डेट के अनुसार जाता रहता था। पी जी आई चंडीगढ़ में ही उसे कहा गया कि आप अपने चेकअप से पहले कोविड19 का टेस्ट बाहर किसी निजी लैब से करवा लें। अब यहां प्रश्न यह उठता है कि जब पी. जी. आई. चंडीगढ़ में भी कोविड 19 के टेस्ट की सुविधा है तो उनको बाहर से निजी लैब से टेस्ट करवाने को क्यों कहा गया? खैर उन्हीं के निर्देशों को मानते हुए उन्होंने अपना कोविड 19 का टेस्ट 25 जुलाई को करवा लिया और पी. जी. आई. में चेकअप के बाद वापिस अपने घर रघुनाथपुरा, बिलासपुर में आ गए जबकि उनके अंदर कोविड 19 के संकेत पहले भी कोई नहीं थे और अब भी कोई नही हैं और न ही इनके परिवार के किसी सदस्य में कोई कोविड 19 के संकेत न पहले थे और न ही अब हैं।
ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा में कोविड 19 के पोजिटिव पाए गए व्यक्ति के सभी परिजनों, पड़ोसियों में डर और दुविधा का मौहल है, तो क्या यह चिकित्सा विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगता, की इस महामारी के प्रति इतना ज्यादा उदासीन रवैया क्यों है? जिला में जो चिकित्सा अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी इस कोविड 19 की कार्य प्रणाली को देख रहे है, उनको चाहिए कि जो परिवार और उनके आस पड़ोस में प्रथम सम्पर्क में जिन व्यक्तियों के सैम्पल लेने है उनको लिया जाए क्योंकि जो 5 दिन का वेटिंग समय होता है वह बीत चुका है और ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा के वार्ड नं 4 और 7 के लोंगो की काउंसलिंग की जाए ताकि वह इस कोविड-19 के कारण डर और दुविधा के मौहल से बाहर आ सके। ऐसा भी लगता है कि कोविड 19 जैसी महामारी को लेकर चिकित्सा विभाग अभी भी तैयार नहीं है और न ही अपने फील्ड स्टाफ को ठीक से ट्रैनिंग दे पाया है और सही जानकारियों के अभाव में कई तरह के डर और दुविधाओं को जन्म दिया जा रहा है जिससे समाज में एक वैचारिक कुरीतियों का भी जन्म हो रहा है और जिसके कारण एक दूसरे के प्रति हीन भावना भी जन्म ले रही है जिसका डर यह है कि यह कहीं सोशल डिस्टेंसिनग से मानसिक डिस्टेंसिनग में न बदल जाए।
