कैप्चर से कल्चर की अवधारणा लेकर मछुआरों को जागरूक कर रही आकांक्षा
वर्तमान युग में शिक्षा का ही सबसे ज्यादा महत्व है, और यदि यही शिक्षा रोजगार उन्मुखी हो तो अपने भविष्य के साथ साथ परिवार का भविष्य भी संवर जाता है लेकिन शिक्षा के माध्यम से समाज का भी यदि उत्थान हो जाए तो पीढ़ियां संवर जाती हैं। एक ऐसा ही सपना लेकर निकल पड़ी है बिलासपुर की बेटी आकांक्षा आर गौतम जिन्होंने कोरोना काल का भरपूर फायदा उठाकर न सिर्फ अपनी शिक्षा को सुचारू रखा बल्कि बिलासपुर जिले के अधिकांश मछुआरों को अपने साथ जोड़ कर उन्हें उन्ही के फील्ड की ऐसी लाभदायक योजनाओं से अवगत करवाया जिससे यहां के मछुआरे अनभिज्ञ थे।
फर्स्ट वर्डिक्ट से बात करते हुए आंकांक्षा आर गौतम ने बताया कि वह गुरू अंगद देव वैटनरी एंड एनिमल साईंस यूनिवर्सिटी लुधियाना में बैचुलर आफ फिशरीज साइंसिज संकाय की दूसरे वर्ष की छा़त्रा है। उसका उद्देश्य मछुआरों को उत्थान की ओर ले जाना है। आकांक्षा आर गौतम ने बताया कि सरकार ने मछुआरा वर्ग के लिए कई लाभदायक योजनाएं चलाई है लेकिन जागरूकता के अभाव में यह योजनाएं पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने कहा कि वे कैप्चर से कल्चर की अवधारणा लेकर मछुआरों को जागरूक कर रही हैं। इस कड़ी के तहत मछुआरे केवल बड़े जलाशय पर ही निर्भर न रहकर अपने छोटे-छोटे तालाबों को निर्माण कर अच्छी किस्म की मछली का उत्पादन 12 महीनों कर सकते हैं क्योंकि उम्दा किस्म की मछली की डिमांड न सिर्फ भारत के राज्यों बल्कि विदेशों में भी हैं। उन्होने बताया कि गोविंद सागर झील के कैचमैंट एरिया के तहत आने वाली खड्डों और नालों को भी इसमें चैनेलाइज कर रोजगार के साधन बनाए जा सकते हैं क्योंकि मछली उत्पादन एक ऐसी क्राॅप है जिसकी सीडिंग के बाद देखरेख करने की कोई आवष्यक्ता नहीं होती। ऐेसे अच्छी नस्ल, किस्म की मछली का उत्पादन मछुआरों की जागरूकता और सोच पर निर्भर करता है।
आकांक्षा ने बताया कि पंजाब राज्य तेजी से फिश उत्पादन में विकसित होने वाला राज्य बन रहा है। जबकि देश के अन्य राज्यों में यह कल्चर काफी मजबूत हैं। बिलासपुर में करीब अढ़ाई हजार परिवार गोविंद सागर जलाशय पर अपनी आजीविका चला रहे हैं। आफ सीजन में इन परिवारों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। हालांकि सरकार इस समय में उनकी आर्थिक मदद भी करती है लेकिन यदि कैप्चर टू कल्चर मछुआरे अपनाते है तो निष्चित तौर पर उनकी आर्थिकी में गुणात्मक सुधार होगा।
