सफलता की कहानी : अर्पिता बनी युवाओं तथा महिलाओं के लिए प्रेरणा
उपमण्डल झंडूता के ग्राम पंचायत भरोली कलां के गांव बलोह की रहने वाली अर्पिता शर्मा मेडिकल लैब में डिप्लोमा करने के उपरांत रोजगार प्राप्त कर लोगों की सेवा करना चाहती थी, क्योंकि उसकी ग्राम पंचायत भरोली कलां के आस-पास 6 ग्राम पंचायतों की लगभग 5 हजार लोगों को अपने टैस्ट करवाने के लिए दूर जाना पड़ता था। उसने सोचा की मेडिकल लैब में डिप्लोमा तो किया ही है क्यों न यहां अपनी क्लिनिक लैब बनाकर लोगों की सेवा की जाए। इससे उसे रोजगार भी मिलेगा और लोगों की सेवा करने का सपना भी पूरा हो जाएगा, लेकिन धन आभाव के कारण वह कुछ भी कर पाने में अपने आप को असमर्थ समझ रही थी।
उसी दौरान उसने रोजगार स्थापित करने के लिए विकास खण्ड झंडूता में उद्योग विभाग के प्रसार अधिकारी से सम्पर्क किया तो उसे मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की जानकारी मिली। इससे उसकी खुशी की ठिकाना न रहा और उसने सोचा की
अब उसकी जिंदगी बदल जाएगी और रोजगार के साथ-साथ लोगों की सेवा करने क सपना भी साकार होगा।
उद्योग विभाग के प्रसार अधिकारी से प्रेरणा लेकर अर्पिता ने अपनी खुद की क्लिनिक लैब खोलने का निर्णय लिया। उसने मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया तथा हिमाचल प्रदेश सहकारी बैंक शाखा से लैब मशीनरी के लिए 10 लाख रुपये का ऋण लिया जिस पर उद्योग विभाग द्वारा 3 लाख रुपये का अनुदान मिला। अर्पिता ने उद्योग विभाग तथा हिमाचल प्रदेश सहकारी बैक के अधिकारियों के सहयोग से नवम्बर, 2019 में अपनी क्लिनिक लैब स्थापित की और उसका कार्य सफलतापूर्वक अच्छा चलने लगा और वह प्रति माह 15 से 20 हजार रुपये कमाने लगी। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना से न केवल अर्पिता ने अपना व्यवसाय शुरू किया बल्कि 2 लोगों को भी रोजगार प्रदान किया और लोगों की सेवा करने लगी। मेडिकल लैब में प्रशिक्षण प्राप्त अर्पिता आज अपने क्षेत्र में बेरोजगार युवाओं विशेषकर महिलाओं के लिए
प्रेरणा का स्त्रोत बनी हुई है।
अर्पिता ने बताया कि अब वे रोजगार के साथ-साथ लोगों की सेवा भी कर रही है। पहले लोगों को क्लिनिक टैस्ट करवाने के लिए 15 से 30 किलोमीटर दूर बरठीं और शाहतलाई, घुमारवीं जाना पड़ता था। भरोली कलां में क्लिनिक लैब स्थापित होने से क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी के साथ-साथ समय की भी बचत हुई है। उन्होंने बताया कि लैब में सभी प्रकार के टैस्ट किए जा रहे है। अर्पिता का कहना है कि युवा वर्ग सरकारी नौकरियों के पीछे भागने के बजाए यदि अपना व्यवसाय स्थापित करें तो वे अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते है और दूसरे लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकते है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलम्बन योजना युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।
जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक प्रोमिला शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, जो कि राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक है जिसके अन्तर्गत सभी प्रकार के औधोगिक कार्यकलाप सर्विस गतिविधियां व व्यापार से संबंधित, अपना रोजगार चलाने के इच्छुक/योग्य हिमाचली युवा जिनकी आयु 18-45 वर्ष के मध्य हो उनको, संबंधित बैंको के माध्यम से 60 लाख रूपये तक का ऋण व वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी जिसमें 40 लाख रूपये तक की प्लांट व मशीनरी पर किए गए निवेश पर विधवाओं को 35 प्रतिशत, महिलाओं को 30 प्रतिशत व अन्य को 25 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त तीन वर्षो के लिए 5 प्रतिशत व्याज अनुदान भी उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश की तरफ से प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती है तथा कोरोना संक्रमण के कारण बाहरी राज्यों से वापिस आए है व दोबारा हिमाचल से बाहर नहीं जाना चाहते हैं अपना कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं वे मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना का लाभ उठा कर, अपना उद्योग व व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
