वर्षों से अपाहिज गौवंश के नाम नहीं हुई जमीन
प्रगति समाज सेवा समिति द्वारा चलाई गई अपाहिज गौवंश गौशाला जमीन पर संवैधानिक कब्जा होने के बावजूद भी जिला प्रशासन कुछ राजनीतिक व शरारती तत्वों के बहकावे में आकर इस जमीन को असंवैधानिक बता रहे है जबकि वर्ष 2014 में उच्च न्यायलय के बेसहारा गौ वंश को रखने के लिए जब आदेश पारित हुए थे तो अपाहिज गौवंश को रखने के लिए कोई भी गौशाला रखने को तैयार नहीं थी। यह बात प्रगति समाज सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार शर्मा ने बताते हुए कहा कि जब कोई भी गौशाला सड़कों पर दुर्घटना ग्रस्त हो रहे गौवंश को रखने को तैयार नहीं थी उस वक़्त जिला प्रसाशन ने भगेड़ में सभी औपचारिकताएं पूरी कर अपाहिज गौवंश के नाम जमीन कर इन पशुओं की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी थी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जिला प्रशासन द्वारा अपाहिज गौवंश की जमीन उनसे जमीन सौंपने से पूर्व पूरी औपचारिकताएं पूरी की गई परन्तु आज उन फाइलों को दबा कर प्रशासन आए दिन जमीन को लेकर अडंगे लगा रहा है जबकि वर्ष 2014 से लेकर आज तक उनके पास अपाहिज पशुओं की संख्या बड़ती जा रही है जिनके लिए उन्हें जिला प्रशासन द्वारा दी गई जमीन पर अपाहिज पशुओं को रखने के लिए सेल्टर बनाने की आवश्यकता पड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकतम गौशालाएं सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर बनाई गई है और उन गौशालाओं में अपाहिज गौ वंश व बेसहारा सड़कों पर घूम रहे पशुओं की अपेक्षा दुधारू गाय रखी गई है। वहीं पर सरकार बेसहारा पशुओं को रखने के नाम पर करोड़ों रुपए की राशि इन गौ शालाओं को चलाने के लिए दे रही है जबकि भगेड में चल रही अपाहिज गौ शाला को चलाने के लिए सरकार से कोई अनुदान नहीं लिया जा रहा है। उसके बावजूद भी प्रशासनिक अधिकारी कुछ शरारती तत्वों के कहने से उनकी सेवा कार्य में बाधा डाल रहे है।
उन्होंने कहा कि वह राजनीति से दूर रहकर बेसहारा गौ वंश की सेवा में लगे है वहीं पर प्रशासन उन्हें अपाहिज गौ वंश की जमीन को लेकर उनके कार्य में बाधा डाल रहा है। दूसरी तरफ कुछ एक राजनीतिक तत्व उन्हें बदनाम करने के लिए उनकी समिति के नाम जाली बैंक अकाउंट खोलकर पैसा इकट्ठा कर रहे है। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 2009 से बेसहारा पशुओं की सेवा से जुड़े है इसलिए उनका मकसद बेसहारा अपाहिज पशुओं को सहारा देना बन चुका है और सरकार से भी आए दिन यही मांग करते है कि प्रदेश में लाखो रुपए की राशि से चल रही गौ शालाओं में दुधारू गायो को रखने की अपेक्षा बेसहारा व अपाहिज गौ वंश को रखा जाए ताकि उनकी गौशाला में रह रहे। अपाहिज पशुओं को भी सरकारी गौशाला में रखकर वह भगेड गौशाला की जमीन प्रशासन को सौंप सके।
