गोबिंदसागर जलाश्य में इस बार बढ़ा मछली उत्पादन
हिमाचल प्रदेश के जलाश्यों एवं सामान्य नदी नालों व इनकी सहायक नदियों में 12 हजार से अधिक मछुआरे मछली पकड़ कर अपनी रोजी रोटी कमाने में लगे हुए हैं। वर्तमान में प्रदेश में 5 जलाश्यों क्रमशः गोबिंदसागर, पौंग, चमेरा, कोलडैम एवं रणजीत सागर जिनका क्षेत्रफल 43785 हैक्टेयर के करीब है, में 5 हजार 300 से अधिक मछुआरे मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं जबकि प्रदेश के सामान्य जलों, ट्राऊट जलों के अतिरिक्त जिनकी लम्बाई 240 0 किमी के लगभग है में 6 हजार से अधिक मछुआरे फैंकवां जाल के साथ मछली पकड़ने के कार्य में लगे हैं। इन सभी मछुआरा परिवारों को निरंतर मछली मिलती रहे तथा लोगों को प्रोटीनयुक्त प्राणी आहार मछली के रूप में मिलता रहे, इसके लिए हिमाचल प्रदेश मत्स्य पालन विभाग अपना दायित्व निभा रहा है।
निदेशक एवं प्रारक्षी, मत्स्य सतपाल मैहता ने बताया कि इतने विशाल मानव निर्मित जलाश्यों की सघन निगरानी करना विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है, परन्तु मत्स्य विभाग इस चुनौती के समाधान के लिए प्रतिवर्ष सामान्य जलों में दो माह के लिए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, क्योंकइस अवधि के दौरान अधिकतर महत्वपूर्ण प्रजातियों की मछलियां प्राकृतिक प्रजनन करती हैं जिससे इन जलों में स्वतः मछली बीज संग्रहण हो जाता है। उन्होंने बताया कि इस कार्य हेतु विभाग को मत्स्य धन संरक्षण का कार्य बड़ी तत्परता से करना पड़ता है। प्रदेश के जलाश्यों में मत्स्य धन संरक्षण हेतु विशेष कर्मचारी बल तैनात कर कैम्प लगाए जाते हैं, जिससे ये कर्मचारी जल एवं सड़क, दोनों मार्गों से गश्त कर मत्स्य धन की सुरक्षा करते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले यह बन्द सीजन 1 जून से 31 जुलाई तक होता था परन्तु 22 मई 2020 से हिमाचल प्रदेश मत्स्य नियम 2020 लागू होने से इस बार विभाग द्वारा 16 जून से 15 अगस्त तक बन्द सीजन का कार्यान्वयन किया गया। उन्होंने बताया कि इस बार विभाग ने 35 लाख के करीब 70 एम.एम. आकार से अधिक का मत्स्य बीज इन जलाश्यों में संग्रहित किया था। दो माह के बंद के बाद बढ़े मत्स्य उत्पादन से विभाग के साथ-साथ मछुआरों का मनोबल भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि गोबिंदसागर जलाश्य से 9.03 टन, कोलडैम 264 किलो, पौंग जलाश्य में 7.2 टन तथा चमेरा व रणजीत सागर से 2.1 टन मछली पकड़ी गई।
