आउटसोर्स कर्मियों के भविष्य पर मंडरा रहा संकट-सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा
सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने नगर निगम शिमला के अंतर्गत पानी के निजीकरण की मुहिम का कड़ा विरोध किया है। सतलुज वाटर प्रोजेक्ट का टेंडर स्वेज़ इंडिया कम्पनी को दिया जा रहा है। शिमला शहर के पानी की स्कीम का रखरखाव व वितरण का कार्य अगले काफी वर्षों के लिए बीओटी के तहत इसी कम्पनी के हवाले होगा। इस तरह एसजेपीएनएल के अधीन इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन के ज़रिए कार्यरत सैंकड़ों आउटसोर्स कर्मियों के रोज़गार पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा व उनके रोज़गार की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। सीटू ने आउटसोर्स प्रणाली पर रोक लगाकर इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की है। सीटू विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि राजधानी शिमला में 24 घण्टे पानी की सप्लाई देने की आड़ में पानी की व्यवस्था के निजीकरण की पटकथा लिखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सतलुज वाटर प्रोजेक्ट का टेंडर स्वेज़ इंडिया कंपनी को दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड के दायरे में कार्य करने वाले कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि एसजेपीएनएल में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों को अब दूसरी कम्पनी में शिफ्ट किया जाएगा। आईपीई ग्लोबल नाम की कम्पनी अब इनकी तैनाती करेगी। पहले शिमला जल प्रबंधन निगम कम्पनी ने इन कर्मचारियों को इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन के ज़रिए रखा था। अब इन्हें तीन साल के भीतर ही दूसरी कम्पनी में शिफ्ट किया जा रहा है। इस से 130 से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि निजीकरण की इस मुहिम का अगला निशाना सैहब सोसाइटी हो सकती है व इस के तहत कार्यरत सैंकड़ों कर्मचारियों के रोज़गाए पर भी निकट भविष्य में खतरा मंडराना तय है।
