हिमाचल: कांग्रेस से बागी हुए पूर्व विधायकों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, पेंशन जारी करने के दिए आदेश
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस से बागी होकर भाजपा में शामिल हुए 6 पूर्व विधायकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अयोग्य घोषित किए गए इन बागी विधायकों को विधानसभा से मिलने वाली पेंशन जारी करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिए कि पात्र याचिकाकर्ताओं की बकाया और नियमित पेंशन एक माह के भीतर जारी की जाए।
आदेशों का पालन नहीं होने की स्थिति में 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह आदेश जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने दिए। कोर्ट में राजेंद्र राणा और रवि ठाकुर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की गई थी, जिनमें पेंशन जारी करने की मांग की गई थी। बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद से ये बागी विधायक पेंशन से वंचित थे।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश दिनांक 07.04.2026 में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक की प्रभावशीलता पूर्व प्रभाव नहीं हो सकती और यह केवल भविष्य के लिए ही लागू होगा। न्यायालय ने साफ निर्देश दिए कि संबंधित पूर्व विधायकों को उनकी पेंशन एवं बकाया राशि एक माह के भीतर जारी की जाए, अन्यथा राज्य को 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
बता दें कि कांग्रेस के छह विधायकों ने फरवरी 2024 में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट किया था। इसके बाद स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने उन्हें अयोग्य ठहराया। इसके बाद इन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने इनकी पेंशन रोकने के लिए 2024 में विधानसभा में संशोधन विधेयक लाया। हालांकि, इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पाई। इसके बाद सुक्खू सरकार ने विधानसभा के हाल में संपन्न बजट सेशन में दोबारा संशोधन विधेयक लाया। इसमें अब यह प्रावधान किया गया कि 14वीं विधानसभा या फिर भविष्य में जो भी विधायक अयोग्य ठहराए जाएंगे उनकी पेंशन बंद होगी। अब यह बिल राज्यपाल की मंजूरी को भेजा जाएगा। यदि राज्यपाल की मंजूरी मिली तो 14वीं विधानसभा के कुटलैहड़ से पूर्व विधायक देवेंद्र कुमार भुट्टो और गगरेट से चैतन्य शर्मा की पेंशन भी बंद हो जाएगी।
