आज तक खर्च नहीं हुआ प्रभावित पंचायतों में 50 करोड़ का डिस्टिक मीनर्ल फंड
एसीसी विस्थापित एवं प्रभावित सभा की बैठक मंगलवार को राधा कृष्ण मंदिर बाग पंजगाई में बाबूराम शर्मा रिटायर्ड अध्यापक की अध्यक्षता में हुई जिसमें प्रभावित 5 पंचायतों बरमाणा, बैरी, पंजगाई, धौन कोठी, धार टटोह के लोगों ने भाग लिया। यह सभी पंचायतें एसीसी सीमेंट फैक्ट्री की माइनिंग से प्रभावित हैं। इस बैठक के दौरान लोगो को संबोधित करते हुए समाजसेवी भगत सिंह वर्मा ने कहा कि इन प्रभवित पंचायतो में जितनी भी माइनिंग हुई उसका फण्ड जिला प्रशासन के पास जमा होता है जिसे जिला प्रशासन इन प्रभावित पंचायतो में स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के लिए खर्च करता है।
वर्मा ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि एसीसी कंपनी अपना यह फंड जिला प्रशासन के पास जमा करवा रही है परन्तु जिला प्रशासन ने 2015 से लेकर आज तक इस फंड का इन प्रभावित पंचायतो के विकास के लिए इस्तेमाल नही किया उन्होंने कहा कि 2015 से लेकर आजतक यह फंड 50 करोड़ के लगभग डिस्टिक मीनर्ल फंड के खाते में जिला प्रशासन के पास जमा है। जो ए सी सी सीमेंट के खदान से मिलने वाली धनराशि है। उन्होंने कहा कि पंजगाई में स्वास्थ्य केंद्र की हालत खस्ता है यहाँ पर मात्र एक चिकित्सक उपलब्ध है। रात्री को इस अस्पताल में कोई चिकित्सक उपलब्ध नही होता। यहाँ पर स्टाफ के रहने के लिए बने क्वाटरो की हालत दयनीय है जिस करान कोई भी कर्मचारी इन क्वाटरो में नही रहता। उन्होंने बताया कि यह अस्पताल करीब दस पंचायतो के लोगो के लिए एक मात्र स्वास्थ्य संस्थान है जिसकी इतनी दयनीय हालत है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि जो इन प्रभावित पंचायतो के लिए डिस्टिक मीनर्ल फंड में पैसा जमा है जोकि मात्र स्वास्थ्य , शिक्षा और पर्यावरण पर खर्च होना है उस पैसे से इस अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाए व उसके भवन निर्माण व आवासीय निर्माण पर इस पैसे को खर्च किया जाए। इसके साथ ही इस पैसे से यहाँ पर आईटीआई बनाया जाए जिसमे वह सब ट्रेड दिए जाए जिन ट्रेडो की आवश्यकता एसीसी सीमेंट कारखाने में है। उन्होंने कहा कि जिन ट्रेडो की आवश्यकता कंपनी में है वह ट्रेड यहाँ उपलब्ध नही है जिसकी वजह से यहाँ के बच्चे उन ट्रेडो में शिक्षा नही ले पा रहे है और इस कंपनी में बाहर के लोगो को रोजगार मिल रहा है। यदि इस पैसे से यहाँ पर आईटीआई का निर्माण हो जाता है तो प्रभावित पंचायतो के बच्चे इस आईटीआई में शिक्षा ग्रहण कर एसीसी कंपनी में रोजगार प्राप्त कर सकते है।
उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस डिस्टिक मीनर्ल फंड समिति में प्रभावित पंचायतो के दो लोगो को शामिल किया जाए ताकि इस फंड का सही जगह पर जरुरत के अनुसार खर्च किया जा सके जिससे स्थानीय लोगो को फायदा हो सके। इसके साथ ही हर बड़े कारखाने में उपरोक्त कुछ अंश सोशल रिस्पांसिबिलिटी के लिए भी होता है जिसके तहत कंपनी प्रभावित पंचायतो के विकास के लिए खर्च करती है। कंपनी इस पैसे को इन प्रभावित पंचायतो में खर्च न करके बाहरी पंचायतो में खर्च कर रही है जोकि गलत है आज तक एसीसी फैक्ट्री ने इस पैसे को इन पांच पंचायतों को छोड़कर अन्य जगहों पर खर्च किया और इसका उपयोग भी चिकित्सा, शिक्षा के क्षेत्र में और प्रतयक्ष अप्रत्यक्ष रोजगार के साधन पैदा करने के लिए किया जाए जो की आज तक नहीं किया गया। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि प्रदेश सरकार प्रभावित विस्थापितों के लिए एसीसी के अंदर प्राथमिकता के आधार पर रोजगार मुहैया करवाए बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उपरोक्त फंड का प्रयोग केवल चिकित्सा शिक्षा व रोजगार उत्पन्न करने पर हो अन्यथा पांच पंचायतों के लोग जन आंदोलन करने पर विवश होंगे। बैठक में समाजसेवी भगत सिंह वर्मा, जय किशन शर्मा, अमरजीत, भुवनेश्वर कुमार, सुशील शर्मा, कुलदीप ठाकुर, बलराम शर्मा, संजीव कुमार रामानंद ठाकुर सहित करीब डेड सों लोगो ने भाग लिया।
