मानव जीवन की 100 वर्ष आयु का वेद व ऋषि परम्परा के अनुसार 4 वर्णों का मिलता है उल्लेख :- महंत कांतेश्वरी दास
**पंचवटी आश्रम का उत्तरी भारत में है सर्वश्रेष्ठ स्थान
मनीष ठाकुर/ इंदौरा: भारतीय ऋषि सनातन परम्परा में मानव जीवन की 100 वर्ष की आयु को चार वर्ण में बांटा गया है। जैसे ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ व सन्यास ,जिसमें प्रत्येक वर्ण को 25 - 25 वर्ष निर्धारित है ।
उक्त धर्म चर्चा 33वें शतचंडी महायज्ञ संत सम्मेलन संजवां पंचवटी धाम में दरबार के सुश्री महंत कांतेश्वरी दास व साध्वी चेतन स्वरूप महाराज ने चारों वर्ण पर व्याख्या करते हुए कहा कि जब इस सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी ने की थी ,उस काल में मानव जीवन को चार भागों में बांट दिया था ।विद्वान ब्राह्मण मंडल में शास्त्री देशराज शर्मा, आचार्य रवि शर्मा , पंडित जोगिंद्रपाल,नवीन आचार्य आदि ने 101 युवकों को महंत के आदेश अनुसार वैदिक व ऋषि परम्परा से उपनयन(यज्ञोपवीत )संस्कार वैदिक मंत्रों से करवाया। प्रत्येक युवक को गुरु मंत्र के साथ साथ यज्ञोपवीत की पवित्रता व ब्रह्मचर्य पालन के नियम बताए।
उल्लेखनीय है कि समूह युवक जिनका 0यज्ञोपवीत हुआ उन सभी को नगर के बाहर 24 घंटे पीतांबर परिधान में भव्य कुटीर में बताए। स्वयं भोजन प्रसाद बनाकर गुरु दीक्षा की पालना की।
धार्मिक आयोजन में दातारपुर, रामपुर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर श्री महंत रमेश दास ने अपने संबोधन में कहा कि पंचवटी धाम उत्तरी भारत में सर्वश्रेष्ठ स्थान है।
श्री महंत कांतेश्वरी दास व अन्य प्रबंधक समिति की धार्मिक सेवाओं के कारण उतरी भारत में इस आश्रम का नाम विख्यात है। धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान श्री कुलराज पठानिया के साथ साथ ठाकुर कुलदीप ,जगदीश ठाकुर, मास्टर विजय, चौधरी छज्जू राम,ठाकुर सुनंदन,ओम दत्त,जीवन बहल, अश्वनी भाटिया तलवाड़ा,अरुण कुमार तलवाड़ा,शर्मा स्वीट शॉप तलवाड़ा,मातृ शक्ति की और से रेणु ठाकुर,कृष्णा देवी,नीलम शर्मा, अंजना ठाकुर,सुनीता ठाकुर,शास्त्रो देवी, संयोगता शर्मा,स्वीट ठाकुर,रानी ठाकुर,किरण ठाकुर,आदि ने दरबार में नतमस्तक होकर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। दरबार के प्रबंधक तरसेम पाल शर्मा के अनुसार अन्नपूर्णा सदन में अमृतरूपी भोजन प्रसाद ग्रहण करने वाले भक्तजनों का रात दिन एक समान तांता लगा हुआ है।
