राेहड़ू : रोहडू ब्लॉक के सभी जिला-परिषद अधिकारी/कर्मचारियों ने बचाया पैन डाउन स्ट्राइक का बिगुल
फर्स्ट वर्डिक्ट। राेहड़ू
हिमाचल प्रदेश जिला-परिषद अधिकारी कर्मचारी महासंगठन के ऐलान पर जिला शिमला के चिड़गांव, डोडरा क्वार, छौहरा ब्लॉक के अंतर्गत व रोहडू ब्लॉक के सभी जिला-परिषद अधिकारी/कर्मचारियों ने भी 27 जून से पैन डाउन स्ट्राइक का बिगुल बजा दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकार की कार्य प्रणाली से नाखुश कर्मचारियों ने सरकार से बार-बार आग्रह करने के बावजूद भी बात न मानने पर ऐसा कदम उठाने के लिए वाध्य होना पड़ा। यह कि संगठन का कहना हैं। कि करीब 22 वर्षों की नौकरी होने फर भी हमे विभाग का कर्मचारी क्यों नहीं माना जा रहा, जिसके लिए यह कार्यकारणी लगातार पिछले चार माह से सरकार से आग्रह कर रही है, परंतु सरकार व विभाग हमारी इस बात को ध्यान से सुनने की वजाय नकारने मे लगी है।
हिमाचल प्रदेश मे कुल 4679 अधिकारी/ कर्मचारी जिला-परिषद के अधीन कार्यरत है, जिसमें मुख्य रुप से सरकार और जनता के बीच कड़ी का काम कर रहे, जमीनी स्तर के कर्मचारी पंचायत सचिव, जिन्हें लोकतंत्र की बुनियादी व महत्वपूर्ण कड़ी "ग्राम पंचायत" स्तर पर पंचायत अधिकारी के तौर पर देखा जाता है, उनके सहयोगी तकनीकी सहायक जो विकास योजनाओं मे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है, कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशाषी अभियंता जिनकी देख-रेख व रेहनुमाई मे सभी महत्वपूर्ण कार्य को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है व लेखापाल, स्टैनोग्राफर जैसे महत्वपूर्ण कर्मचारी विद्यमान है। इसलिए जिला शिमला के रोहडू उप मंडल दोनों ब्लॉक छुहारा व रोहडू के कर्मचारी संगठन ने भी यह निर्णय लिया है कि जब तक सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती हैं।
हम अपनी अनिश्चित कालीन काम छोड़ाे स्ट्राइक पर अडिग रहेंगे। अभी हमारी यह स्ट्राइक शांतिपूर्ण ढंग से विकास खंड कार्यालय मे प्रातः 10:00 बजे से शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। इनके समर्थन में प्रधान परिषद एकता मंच छुहारा में भी आज प्रघान परिषद के अध्यक्ष ललित कायथ की अध्यक्षता में आज प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्हाेंने कहा कि यदि इनकी मांग पुरी नहीं की जाती है, तो हम जनता के नुमाइंदों को भी मजबूरन इनके साथ धरने पर बैठना पड़ेगा, जिसकी खामियाजा सरकार को भुक्तना पड़ेगा।क्योंकि इन कर्मचारियों की पैन डाउन हड़ताल से हर पंचायत में काम काज ठप हो चुके हैं। धरातल पर सरकार की मंशा व कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है, जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले समय में भुगतना पड़ सकता हैं।
