भवानी पठानिया, वो नेता जिसका अंदाज सबसे जुदा है ...
फतेहपुर विधायक भवानी पठानिया सियासत का वो चमकता सितारा है जिसने बेहद कम समय में सबको अपना मुरीद बना लिया है। भवानी वो नाम है जिन्होंने सियासत में आकर न तो अपना नजरिया बदला और न ही काम करने का तरीका, बल्कि अपनी अलहदा कार्यशैली से अपनी एक अलग जगह बना ली है। कॉर्पोरेट जगत में दशकों तक अपनी बेजोड़ कार्यशैली से छाप छोड़ने वाले भवानी सियासत में आकर भी उसी नियम कायदे से काम करते है l बाकायदा एक्सेल शीट्स तैयार होती है, प्रायोरिटी लिस्ट तय होती है, किसी भी योजना पर काम करने से पहले फिजिबिलिटी एनालिसिस होता है और फिर विधायक उस हिसाब से जनता की समस्याओं का निवारण करते है l भवानी की सोच बिलकुल स्पष्ट है, जनता का एक एक पैसा पूरी पारदर्शिता से व्यय हो और उसका जनहित में सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल हो l
भवानी सिंह पठानिया की एक और बात निराली है और वो है लोगों में घुलमिल जाना l इसे भवानी की सादगी ही कहेंगे की वर्षों तक कॉर्पोरेट जगत में ऊँचे ओहदे पर काम करने वाले भवानी स्थानीय लोगों के साथ परिवार जैसा रिश्ता रखते है आम जनता और उनके बीच कोई दीवार नहीं है। जब जो चाहे अपने विधायक से आकर मिल सकता है और विधायक भी निरंतर अपने लोगों के बीच पहुंच जाते है। दूसरी बार के विधायक भवानी का कुल कार्यकाल अभी करीब डेढ़ साल का ही है लेकिन उनका और सुजानपुर की जनता का रिश्ता बेहद मजबूत है। हर बात को रखने का भवानी का अपना तरीका है। बेहद हल्के ढंग से भवानी बेहद गंभीर मसलों पर अपनी बात रख जाते है। भवानी पठानिया के सेंस ऑफ़ ह्यूमर के भी बहुत लोग कायल है।
विरासत को बखूबी संभाला :
फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र पूर्व मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सुजान सिंह पठानिया का गढ़ था। जनता से उनका जुड़ाव इस कदर था की जब भी पठानिया चुनावी मैदान में उतरते तो ये लगभग स्पष्ट हो जाता की जनता का प्यार किसे मिलेगा। पूर्व मंत्री स्व. सुजान सिंह पठानिया 1977 से लेकर सात बार एमएलए रहे। जब 2021 में उनका देहांत हुआ तो लगा मानों अब परिस्थितियां बदल जाएगी l उनके निधन के बाद उप-चुनाव हुआ और उनके बेटे भवानी पठानिया मैदान में उतरे l भवानी एक बैंकर थे और उस वक्त शायद ही किसी ने ये सोचा हो की बैंकिंग की दुनिया छोड़ कर भवानी राजनीती में टिक पाएंगे l परिवारवाद को लेकर भी खूब हो हल्ला मचा मगर इसके बावजूद भवानी पठानिया ने खुद को साबित किया और शानदार तरीके से चुनाव जीता l यही नहीं भवानी ने अगला चुनाव पूर्व सरकार में मंत्री रहे राकेश पठानिया के खिलाफ लड़ा मगर राकेश पठानिया भी भवानी के तिलिस्म के आगे नहीं टिक पाए और भवानी शानदार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे l आज परिस्थितियां ऐसी है की भवानी सिंह पठानिया मंत्री पद की रेस में है जबकि उन्हें राजनीती में आए अभी ठीक से दो साल भी पूरे नहीं हुए l
वित्तीय योग्यता आ सकती है प्रदेश के काम :
भवानी पठानिया आर्थिक और वित्तय मामलों के जानकार है और उन्हें लम्बा अनुभव है । वे प्रदेश की आर्थिकी को बखूबी समझते है l प्रदेश की बिगड़ी आर्थिकी को संभालने के लिए भवानी अक्सर आसान भाषा में कई सुझाव सामने रखते है जो हर किसी को समझ आ जाए l जानकार मानते है की भवानी की ये योग्यता प्रदेश के आर्थिकी को पटरी में लाने में महत्वपूर्ण हो सकती है l ये ही कारण है की राजनैतिक माहिर मानते है की मौजूदा सरकार में भवानी पठानिया को महत्वपूर्ण ज़िम्मा मिल सकता हैl वहीँ समर्थक मानते है की कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री पद मिल सकता है ।
Note- ADVT
