कांग्रेस के गढ़ में पहली बार खिला कमल, रामपुर में बदले राजनीतिक समीकरण
हिमाचल प्रदेश के रामपुर बुशहर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस और होली लॉज का मजबूत गढ़ माने जाने वाले रामपुर में पहली बार भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने बहुमत हासिल किया है। इसे आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
नगर परिषद रामपुर के 9 वार्डों में से 5 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार 4 वार्डों में ही जीत हासिल कर सके। हालांकि दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं रहा, लेकिन भाजपा ने एक सीट की बढ़त के साथ परिषद पर कब्जा जमा लिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत सिर्फ स्थानीय निकाय चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि रामपुर के बदलते राजनीतिक माहौल को भी दर्शाती है। जिस क्षेत्र में भाजपा कभी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाई, वहीं अब नगर परिषद में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन मजबूत रहा है।
इस परिणाम को लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और होली लॉज के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार नंदलाल यहां बेहद कम अंतर से जीत दर्ज कर पाए थे। उस समय कांग्रेस ने रामपुर सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या रामपुर में कांग्रेस और होली लॉज की पकड़ कमजोर पड़ रही है, या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी दोबारा मजबूती से वापसी करेगी। फिलहाल नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
