शिमला : भाजपा नेताओं ने राज्यपाल को कांग्रेस सरकार के विरुद्ध साैंपा ज्ञापन
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला
हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार देखने को मिल रहा है, जब किसी सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरूआत जनविरोधी निर्णयों से की हो। किसी भी प्रदेश की उन्नति, प्रगति एवं विकास तभी संभव है, जब उस प्रदेश की सरकार सकारात्मक सोच और दलगत राजनीति से उपर उठकर कार्य करें, परंतु हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली बदला-बदली एवं राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। उन्हाेंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश सरकार ने पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा जनता के हितों व सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए बजटीय प्रावधान के साथ जो सरकारी संस्थान खोले थे, उन्हें राजनीतिक द्वेष के चलते बंद करने के आदेश पारित किए हैं। उन्हाेंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अब तक राज्य विद्युत 32, स्वास्थ्य संस्थान (पीएचसी, सीएचसी, अस्पताल) 291, विभाग के तहसीलें 3, उप-तहसीलें 20, कानूनगो सर्किल 9, पटवार सर्किल 80, आईटीआई 17, रेवेन्यू सब डिवीजन सर्किल, डिवीजन-सब-डिवीजन, सैक्शन 16, 2, लोक निर्माण विभाग एसडीपीओ, पुलिस स्टेशन, पुलिस पोस्ट 18, आयुर्वेदिक अस्पताल 3, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र 41, अन्य 42 सहित 574 कार्यालयों को बंद कर दिया गया है, जो न केवल जनविरोधी है, बल्कि तानाशाही निर्णय है, जिसे कदापि सहन नहीं किया जा सकता।
उन्हाेंने बताया कि भाजपा सरकार ने कैबिनेट बैठक में निर्णय लेकर सभी संस्थान आवश्यकतानुसार एवं बजटीय प्रावधान के साथ खोले थे। इन कार्यालयों में कामकाज सुचारू रूप से चलना प्रारंभ भी हो गया था और लोगों को सुविधाएं भी मिल रही थी, परंतु मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बिना कैबिनेट बैठक के विभिन्न सरकारी संस्थानों को बंद करने के आदेश पारित कर दिए जो कि कानून संगत भी नहीं है और कांग्रेस पार्टी की संकीर्ण व दुषित मानसिकता का परिचायक है। उन्हाेंने बताया कि हिमाचल प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पार्टी को जनमत देकर प्रदेश की कमान सौंपी है, परंु कांग्रेस पार्टी जनमत का अपमान करते हुए कुंठित मानसिकता एवं राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से निर्णय लेकर जनता के हितों से खिलवाड़ कर रही है। प्रदेश सरकार इस प्रकार की तानाशाही कार्यशैली अपनाकर हिमाचल प्रदेश में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं एवं जनभावनाओं का हनन करने का प्रयास कर रही है, जो सर्वथा अनुचित है।
उन्हाेंने बताया कि कांग्रेस सरकार को चाहिए था कि वो पूर्व भाजपा सरकार के कार्यों को आगे बढ़ाकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करती, परंतु यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस सरकार सत्ता प्राप्ति के बाद से ही अपनी राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति के लिए जनहितों के विरूद्ध कार्य कर रही है, जिसकी भारतीय जनता पार्टी कड़े शब्दों में आलोचना करती है और आपसे विनम्र आग्रह करती है कि प्रदेश सरकार द्वारा राजनीतिक द्वेष की भावना से लिए गए इन सभी निर्णयों को तुरंत जनहित में वापस लिया जाए, ताकि प्रदेश में विकास की अविरल धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी इन जनविरोधी निर्णयों के विरूद्ध पूरे प्रदेश में जन आंदोलन करेगी।
