देहरा: केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में स्थापना दिवस के अवसर कानूनी जागरूकता पर व्याख्यान
विनायक ठाकुर/देहरा: केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश ने अपने 15वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में समाज शास्त्र एवं सामाजिक निर्विज्ञान विभाग द्वारा एक प्रेरणादायक गेस्ट लेक्चर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को न्याय और कानूनी प्रणाली के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम का आरंभ एसोसिएट प्रोफेसर विश्व ज्योति द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, एडवोकेट अभिषेक, और उनके सहयोगी, एडवोकेट सुनील, का परिचय देते हुए उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. विश्व ज्योति ने स्थापना दिवस के महत्व पर भी संक्षिप्त चर्चा की और इस आयोजन को ज्ञानवर्धन का एक सुनहरा अवसर बताया। एडवोकेट अभिषेक पाधा ने अपने व्याख्यान में भारतीय न्याय प्रणाली के ऐतिहासिक और आधुनिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रेरणादायक कहानी का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य निष्पक्षता और न्याय की स्थापना करना है। उन्होंने मुगल युग का संदर्भ देते हुए बताया कि उस समय कोई संहिताबद्ध कानून नहीं थे और न्यायप्रणाली लोक परंपराओं पर आधारित थी। इस संदर्भ में अकबर और बीरबल की न्यायप्रणाली का उदाहरण देकर उन्होंने ऐतिहासिक दृष्टिकोण को रोचक बनाया।आधुनिक न्याय प्रणाली की संरचना पर चर्चा करते हुए एडवोकेट अभिषेक ने बताया कि वर्तमान में कानून समाज में संतुलन और संबंध बनाए रखने के लिए संहिताबद्ध रूप में मौजूद हैं। उन्होंने निर्भया कांड और अन्य प्रासंगिक मामलों का उल्लेख करते हुए न्याय प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने समकालीन न्यायिक चुनौतियों पर भी चर्चा की और न्यायालयों की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विभागाध्यक्ष अनिल कुमार ने एडवोकेट अभिषेक और एडवोकेट सुनील जी को उनके विचारोत्तेजक व्याख्यान के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने इस गेस्ट लेक्चर को छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया। इस अवसर पर विभाग के सभी संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित रहे। गेस्ट लेक्चर के आयोजन में विभाग की सक्रिय भागीदारी और छात्रों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने इसे एक सफल और प्रेरक आयोजन बना दिया।
