धर्मशाला : डरोह में मनाया जिला स्तरीय विश्व मलेरिया दिवस
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा के सौजन्य से आज जिला स्तरीय विश्व मलेरिया दिवस ब्लॉक भवारना के अंतर्गत डरोह में मनाया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को मलेरिया के बारे में जागरूक करना था। जानकारी देते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तरुण सूद ने बताया कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। आमतौर पर गर्मियों तथा बरसात में यह मच्छर पैदा होता है। मच्छर चार प्रकार के होते हैं। परंतु हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक प्लाज्मोडियम वाइबैक्स होता है। कुछ मामले प्लाज्मोडियम फैलसीपैरम के भी पाए जाते हैं।
मच्छर के काटने के बाद 10 से 14 दिन के भीतर व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण आ जाते हैं। इसमें मनुष्य को सर्दी के साथ बुखार आता है, इसलिए जरूरी है कि जब भी बुखार आए तो मलेरिया के लिए खून की जांच जरूर करवाएं तथा मलेरिया की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाई का प्रयोग करें। इसकी दवाई स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त उपलब्ध होती है। मलेरिया गर्भवती माताओं और बच्चों में खतरनाक हो सकता है। अगर हम समय पर अपना इलाज ना करवाएं तो व्यक्ति की जान भी जा सकती हैं ।आगे जानकारी देते हुए जिला जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी जगदंबा मेहता ने बताया कि मलेरिया से बचने के उपाय बड़े सरल हैं ।इसमें बुखार आने पर नजदीक के स्वास्थ्य संस्थान में जाकर अपने खून का परीक्षण कराएं। अपने घर के इर्द-गिर्द साफ-सफाई रखें। गड्ढे मिट्टी से भर दें, पानी कहीं भी खड़ा ना होने दें। कूलर का पानी समय-समय पर बदलते रहें, घर में जाली का दरवाजा बंद रखें, ताकि घर में मच्छर प्रवेश न कर सके, पूरी बाजू के कपड़े पहने। अगर बहुत मच्छर है तो सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
स्वास्थ्य शिक्षिका अंजलि ने बताया कि 2030 तक भारत को मलेरिया मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अतः मलेरिया से बचाव के लिए जो भी जानकारी दी है, उसे अपनाएं तथा संदेश को जन जन तक ले जाएं। इस मौके पर संबंधित गांव के प्रधान, स्वास्थ्य शिक्षिका दया देवी , स्वास्थ्य पर्यवेक्षिका, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता , आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा आम जन जनमानस उपस्थित रहे।
