धर्मशाला : वन रैंक, वन पेंशन-2 की विसंगतियों को दूर करे सरकार
वन रैंक, वन पेंशन पार्ट 2 के तहत पेंशन में आई विसंगतियों को लेकर पूर्व सैनिकों ने संघर्ष का रास्ता अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में सोमवार को जिलाभर के पूर्व सैनिकों ने डीसी कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेना में दिव्यांगता, विधवा या इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अनहोनी होने पर जो पेंशन सैनिकों को दी जाती है। उसमें अफसरों से लेकर जवानों तक भारी अंतर है। यदि एक अधिकारी दिव्यांगता को प्राप्त होता है तो सेना की तरफ से उसे 2.41 लाख पेंशन के रूप में दिए जाते हैं, लेकिन यदि एक जवान दिव्यांग हो जाए तो उसे महज 15 हजार रुपए पेंशन दी जा रही है। दूसरी तरफ पूर्व सैनिक राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि वन रैंक वन पेंशन मुद्दे को लेकर जो संघर्ष यहां पर शुरू हुआ है यह दिल्ली तक जाने वाला है।
पूर्व ऑनरेरी कैप्टन कपूर सिंह गुलेरिया ने कहा कि अधिकारी ज्यादा डिसेबिलिटी लेकर आ रहे हैं, ऑफिसर और जवान दोनों गोली खाते हैं, लेकिन इसमें भी अधिकारियों को ज्यादा भत्ता दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के ध्यान में हम इन सभी मांगों को लाना चाहता हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा का चुनाव आ रहा है, हमारी मांगें पूरी न हुई तो हम सरकार गिराना भी जानते हैं और उठाना भी जानते हैं। हमें राजनीति से कोई मतलब नहीं, हमारी मांगें न मानी गई तो जो भी सरकार केंद्र में बैठी है, उसे सबक दिखाएंगे।
पूर्व सैनिक सुनील खनका ने कहा कि 1965 और 1971 की लड़ाई में जिन सैनिकों ने अपनी जान लगाई है, उनकी पेंशन कुछ भी नहीं है। एक ओआर की पत्नी को 9 हजार पेंशन मिलता है और एक अधिकारी की पत्नी को 72 हजार पेंशन मिलता है, सैनिकों व अधिकारियों की पत्नियों में भी रैंक होता है क्या, उनके पति रैंक में आए थे, उनकी पत्नियां रैंक में नहीं है। अधिकारियों की पेंशन बढ़ाई गई, जबकि निचले स्टाफ की पेंशन को कम किया गया है। पे-कमीशन में जेएसओार को भी रखा जाए। पीएम ने रेवाड़ी में पूर्व सैनिकों से वादा किया था कि मैं फौजी के साथ हूं। हर दीपावली पर पीएम बॉर्डर पर सैनिकों से मिलने जाते हैं, लेकिन वेल्फेयर के मामले में जीरो हैं।
