धर्मशाला : पालमपुर पुलिस की वकील पर अभद्र टिप्पणी व थप्पड़ मारना दुर्भाग्यपूर्ण : चक्षु
** कहा, हिमाचल प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ी
** अधिवक्ता को नहीं, बल्कि कानून व संविधान को कुचलने की कोशिश
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा बार एसोसिएशन धर्मशाला के प्रवक्ता व सदस्य एडवोकेट विश्व चक्षु ने पालमपुर पुलिस की ओर से अधिवक्ता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने व थप्पड़ मारने सहित अन्य कृत्य किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने इस कृत्य के खिलाफ प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं देखकर स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि प्रदेश में लॉ एंड आर्डर की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है। कानून के पालनकर्ताओं व न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता का अपमान सीधे तौर पर कानून व संविधान के खिलाफ उंगली उठाना है। ऐसे में यह कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा, सरकार के जल्द उचित कदम न उठाने पर अधिवक्ता संघ सख्त से सख्त कदम उठाएगी।
एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि जबकि पुलिस थाने में कानून के जानकार वकील ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की क्या हालत होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है, उनपर तानाशाही व गुंडाराज चलाने के लिए नहीं है। विश्व चक्षु ने कहा कि पालमपुर के अधिवक्ता को थप्पड़ नहीं पड़ा, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के, पूरे भारत वर्ष के अधिवक्ताओं को थप्पड़ पड़ा है। एडवोकेट चक्षु ने कहा कि हम पुलिस का सम्मान करते हैं, पुलिस की वर्दी का सम्मान करते हैं। इसी तरह पुलिस को भी काले कोर्ट का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह वर्दी का गुंडाराज चलने नहीं दिया जाएगा। जिस प्रकार पुलिस ने वकील से शर्मनाक हरकत की है, कैसे पुलिस पर आम लोग विश्वास करेंगे। अधिवक्ता वर्ग समाज में शान्ति-व्यवस्था बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। विधि-व्यवसाय में उनका दृष्टिकोण विवादों की संख्या को बढ़ाना नहीं होता, अपितु आसन्न विवादों का समाधान ढूंढना होता है। इस प्रकार अधिवक्ता समाज में भाई-चारे की भावना बढ़ाकर समाज की विधिक व्यवस्था कायम रखने का गुरूतर कार्य संपन्न करते हैं। एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि एक वकील सामाजिक मार्गदर्शक होता है, और उसका बहुत महत्व होता है। आम जनता कानून की सटीक भाषा और उसके उचित कार्यान्वयन की प्रक्रिया को नहीं समझ पाती है। यह वकील की भूमिका है, जो समाज को कानून के शासन और उसके बंधनों से अवगत कराता है। वकील कानूनी व्यवस्था और लोगों के बीच एक पुल बनाते हैं।
इसके अलावा, समान वकील-ग्राहक संबंध स्थापित करने के लिए वकील की भूमिका को आचार संहिता के आधार पर परिभाषित किया गया है। वकील की भूमिका लोगों के लाभ और समाज की भलाई के लिए है। बकौल एडवोकेट विश्व चक्षु ने कहा कि अधिवक्ताओं का इस देश और समाज के लिए बहुत बड़ा योगदान है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर किसी भी संघर्ष और जन-आंदोलन में अधिवक्ताओं के योगदान रेखांकित किए बिना कोई भी अध्याय अधूरा रहेगा। संविधान की रक्षा और न्याय के लिए अधिवक्ता ही सबसे बड़ी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पुलिस की प्रताडऩा से पीड़ित वकील का व्यक्तिगत झगड़ा नहीं था, और न ही उसने अपनी कोई जमीन बंटवानी थी, वह अपने मुवक्किल के काम के लिए पुलिस स्टेशन गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस कर्मी पब्लिक डीलिंग के काम के लिए बिल्कुल भी सूटेबल नहीं हैं।
ऐसे पुलिस कर्मियों को पब्लिक डीलिंग में नहीं बल्कि पुलिस लाईन में हाज़िर कर देना चाहिए। एडवोकेट विश्व चक्षु ने जहां निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं कहा कि जब तक जांच पूरी न हो जाए तब तक उन पुलिस कर्मियों को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर किए जाने की बात रखी है। विश्व चक्षु ने कहा कि अगर वकील को इंसाफ नहीं मिला तो अधिवक्ता संघ पुलिस के खिलाफ आंदोलन करने से भी गुरेज नहीं करेगा।
