धर्मशाला : अक्षय ऊर्जा को बड़े पैमाने पर संग्रहित करने की जरूरत : डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर
एनर्जी ट्रांजिशन के लिए ईको-इनोवेशन पर जी20 रिसर्च इनोवेशन एंड इनिशिएटिव गैदरिंग (आरआईआईजी) सम्मेलन 19 अप्रैल को धर्मशाला में संपन्न हुआ। सम्मेलन में कुल 29 विदेशी प्रतिनिधियों और 30 भारतीय विशेषज्ञों और भारत सरकार के विभिन्न वैज्ञानिक विभागों/संगठनों से आमंत्रित लोगों ने भाग लिया। इसकी अध्यक्षता डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर, सचिव डीएसटी और अध्यक्ष-आरआईआईजी ने की।
रिसर्च इनोवेशन इनिशिएटिव गैदरिंग (आरआईआईजी) जी20 फोरम की एक नई पहल है, जिसे 2022 में इंडोनेशियाई प्रेसीडेंसी के दौरान शुरू किया गया था। सम्मेलन में भाग लेने वाले जी20 देश इंडोनेशिया, तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, सऊदी अरब, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड, फ्रांस, नीदरलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के प्रतिनिधि शामिल रहे। सम्मेलन में सतत एनर्जी ट्रांजिशन के लिए जी20 देशों की सर्वोत्तम प्रथाओं और नीति मॉडल को साझा करने पर विचार-विमर्श किया गया।
डीएसटी के सचिव और जी20-आरआईआईजी के अध्यक्ष डॉ. श्रीवारी चंद्रशेखर ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा, "हम अपने अस्तित्व में एक महत्वपूर्ण क्षण में हैं, जहां हमें जीवाश्म ईंधन खपत से दूर परिवर्तन को प्राथमिकता देनी चाहिए। अक्षय ऊर्जा के दोहन की क्षमता हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर कैप्चर करने, परिवर्तित करने और संग्रहीत करने के लिए एक विशाल प्रयास की आवश्यकता है, जिसे एक साथ काम करके पूरा किया जा सकता है।”
अगली आरआईआईजी बैठक दीव में एक स्थायी नीली-अर्थव्यवस्था के लिए वैज्ञानिक चुनौतियों और अवसरों के विषय पर आयोजित की जाएगी। आरआईआईजी बैठकें 5 जुलाई को मुंबई में आरआईआईजी शिखर सम्मेलन और अनुसंधान मंत्रियों की बैठक के साथ समाप्त होंगी और जी20 सदस्यों द्वारा एक संयुक्त घोषणा को अपनाया जाएगा।
