डॉ. शिखा सूद ने पित्त की नली के कैंसर का किया बिना चीरफाड़ उपचार
शिमला :कोविड-19 के इस दौर में एक तरफ जहां कोरोना संक्रमण ने पूरी तरह से हेल्थ सिस्टम को हिलाकर रख दिया है, वहीं कुछ ऐसे चिकित्सक भी हैं जो जान जोखिम में डालकर मरीजों का समय पर इलाज कर उन्हें नई ज़िंदगी दे रहे हैं। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए डॉक्टर्स भगवान से कम नहीं होते। बहुत से ऐसे मरीज होते हैं जिनका समय पर इलाज न हो तो समस्या गंभीर हो जाती है। मंगलवार को एक ऐसे ही मरीज का सफल ऑपरेशन आईजीएमसी के इतिहास में पहली बार हुआ है। यह ऑपरेशन रेडियोलॉजी विभाग से इंटरवेशन रेडियोलॉजिस्ट एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिखा सूद ने किया। उन्होंने गॉलब्लैडर के कैंसर से ग्रसित 51 वर्षीय शिमला निवासी कर्मचंद का 2017 में ऑपरेशन किया था। इसके बाद उन्हें कीमोरेडियोथेरेपी दी गई थी। 2021 में मरीज को पीलिया हुआ तो अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन तथा पेटसीटी से पता चला कि कैंसर की वजह से उनके जिगर के पास लिम्फ नोड बन गए हैं तथा उनकी पित्त की नली में रुकावट आ रही है। इसकी वजह से उन्हें पीलिया हो गया है। क्योंकि इन लिम्फ नोड ने जिगर की आरट्रीज को घेर रखा था। अत: चिकित्सकों के लिए दोबारा ऑपरेशन संभव नहीं था। रेडियोलॉजी विभाग से इंटरवेशन रेडियोलॉजिस्ट एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शिखा सूद ने बिना चीरफाड़, बिना बेहोश किए मरीज की पेट की चमड़ी से जाते हुए जिगर से गुजरकर रुकी हुई पित्त की नलियों को कैथेटर डालकर खोल दिया तथा उनका पित्त इस ऑपरेशन के बाद सामान्य रूप आंतों में जाने लगा तथा मरीज का पीलिया बिल्कुल ठीक हो गया। इसके बाद मंगलवार को मरीज को इस कैथेटर के द्वारा ब्रेकीथेरेपी दी गई। इससे की मरीज में पड़े लिम्फ नोड को जला दिया गया ताकि वह कैथेटर तथा भविष्य में डाले जाने वाले स्टेंट को बंद न कर सके। इस तरह का यह पहला सफल ऑपरेशन आईजीएसमी के इतिहास में पहली बार हुआ है। डॉ. शिखा सूद का कहना है कि इस उपचार से अब वह मरीज जो गॉलब्लैडर के कैंसर, पित्त की नलियों का कैंसर जैसे पैरीएम्पूलरी कैंसर आदि जैसों बीमारियां जो कि ऑपरेशन करने के दायरे से बाहर जा चुके होते हैं, का इलाज संभव हो सकेगा। यह अपने आप में आईजीएमसी के इतिहास में एक नए दौर का इलाज है। इस ऑपरेशन के दौरान रेडियोथेरेपी विभाग के एचओडी डॉ. मनीष, डॉ. दीपक तुल्ली, डॉ. ललित तथा रेडियोलॉजी विभाग के डॉ जॉन, रेडियोग्राफर तेजेंद्र एवं नर्सिज ज्योति, सुनीता व वैजंती भी मौजूद रहे।
