आपदा से निपटने में काम आएगा बुजुर्गों का अनुभव, ग्रामीण स्तर पर बनेंगे वरिष्ठ मंडल: एडीएम
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धर्मशाला, 21 अगस्त। समाज के लिए अपना सहयोग देने की इच्छा रखने वाले बुजुर्ग नागरिकों और सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए अब वरिष्ठ मंडल बनाए जाएंगे। महिला मंडल और युवा मंडलों की तर्ज पर ग्रामीण स्तर पर बुजुर्ग नागरिकों के लिए वरिष्ठ मंडल का गठन किया जाएगा। वरिष्ठ नागरिक दिवस के उपलक्ष्य पर आज बुधवार को क्षेत्र के बुजुर्ग नागरिक और गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में एडीएम कांगड़ा डॉ. हरीश गज्जू ने यह बात कही। डीसी ऑफिस धर्मशाला में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीएम ने कहा कि कई ऐसे सेवानिवृत कर्मचारी और बुजुर्ग हैं जो समाज के लिए अभी भी अपना योगदान देना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के अनुभव और उपलब्धता का लाभ लेते हुए अनेक प्रकार के सामाजिक कार्यों में उनका सहयोग और मार्गदर्शन लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की भागीदारी से जहां एक तरफ वे सक्रिय रहेंगे, वहीं उनके अनुभवों से हमें आपदाओं से निपटने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि आपदा के दौरान खतरे के न्यूनीकरण और तैयारियों के लिए स्वयंसेवियों की बहुत कमी देखने को मिलती है। कई युवा शिक्षा और बेहतर रोजगार के अवसरों की तलाश में अपने क्षेत्रों से बाहर जाते हैं। इस संदर्भ में, सेवानिवृत्त बुजुर्ग आशा की किरण के रूप में उभर सकते हैं।
बकौल एडीएम, बुजुर्गों के पास अनुभव का खजाना है, क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है, और सामाज की बेहतरी के लिए प्रतिबद्धता है, जो आपदा प्रबंधन और तैयारियों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। वरिष्ठ मंडल के गठन से सेवानिवृत्त लोगों के कौशल, ज्ञान और समर्पण का उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के व्यापक जीवन अनुभव और स्थानीय भुगोल की समझ को आपदा प्रबंधन के लिए स्थानीय स्तर पर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की भागीदारी स्थानीय निवासियों को संगठित कर सकती है और आपदा की तैयारियों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ा सकती है।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ मंडलों द्वारा लोगों को आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूक भी किया जा सकता है। इसके लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण और तैयारियों को लेकर वरिष्ठ मंडल सार्वजनिक सेमिनार, सामुदायिक अभ्यास, सूचना अभियान तथा स्थानीय स्कूलों और संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सामाजिक देखभाल, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण संबंधी मुद्दों और आपदा प्रबंधन जैसी प्रमुख सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने में बुजुर्गों को सक्रिय रूप से शामिल करना है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
इस दौरान सेवानिवृत प्रो. अंजन कालिया, डॉ. रजिका, अनीता शर्मा, हरजीत भुल्लर सहित अन्य हितधारकों ने भी वरिष्ठ मंडल और सामाजिक गतिविधियों में बुजुर्गों की सहभागिता पर अपने विचार रखे।
