सरकारें ले छावनियों की देनदारियां, तभी सिविल क्षेत्र हो सकेंगे बाहर
छावनियों के सिविल क्षेत्रों को स्थानीय निकायों में मिलाने को लेकर रक्षा मंत्रालय ने नई शर्त तय की है। मंत्रालय छावनियों से सिविल क्षेत्रों को बाहर करने को तैयार है, लेकिन इसमें राज्य सरकारों को छावनियों की सभी देनदारियां भी लेनी होंगी। तभी छावनियों से सिविल क्षेत्र बाहर होंगे। मंत्रालय की संपदा शाखा ने शहरी विकास (यूडी) सचिवों को नई शर्त से संबंधित पत्र भेज दिए हैं। छावनियों में पुरानी और लीज पर दी गई सभी संपत्तियां भी राज्य सरकार को मिलेंगी। मंत्रालय सिविल क्षेत्रों को निशुल्क बाहर करने को भी तैयार है। छावनी से सिविल क्षेत्र बाहर आने के बाद इसमें टैक्स लगाना, सुविधाएं देना राज्य सरकार का निर्णय होगा। हालांकि इसमें यह भी तय किया है कि जो क्षेत्र सेना के लिए जरूरी हैं, उन्हें बाहर करने पर दोबारा विचार होगा, चाहे वह कृषि भूमि ही क्यों न हो। बीते दिन हुई छावनियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। रक्षा मंत्रालय की संपदा शाखा के दक्षिण कमान के उप निदेशक हेमंत यादव ने फिलहाल देश की 13 छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजे हैं।
संपदा शाखा ने यह पत्र देश की 13 छावनी अधिकारियों को भेजे हैं। इनमें सैन्य स्टेशन भी हैं। इनमें महाराष्ट्र में अहमदनगर, कामठी, औरंगाबाद, खड़की, पुणे व मध्य प्रदेश में मोरार, सागर, राजस्थान में अजमेर, नसीराबाद, केरल में कन्नूर देवलाली, उत्तर प्रदेश में बबीना, कर्नाटक में बेलगाम व तेलंगाना में सिकंदराबाद शामिल है। रक्षा मंत्रालय से आई शर्तों के बाद राज्य सरकारों ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसमें जल्द शहरी विकास विभाग के सचिव संबंधित छावनियों के उपायुक्तों के साथ बैठक कर दोबारा रिपोर्ट बनाई जाएगी। आचार संहिता से पहले संबंधित उपायुक्त इसकी एक रिपोर्ट सौंप चुके हैं। रक्षा मंत्रालय से नए निर्देश जारी हुए हैं। दोबारा रिपोर्ट तैयार कर सरकार के माध्यम से रक्षा मंत्रालय की संपदा शाखा को भेजेंगे। हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले में बकलोह और डलहौजी, सोलन में सपाटू, कसोल, डगशाई और शिमला में जतोग छावनी क्षेत्र हैं।
