शिमला : मांगाें काे लेकर मुख्यमंत्री से मिला हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन
फर्स्ट वर्डिक्ट। शिमला
हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन की प्रदेश कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग के नेतृत्व में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से ओक ओवर शिमला में नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता की मांग के संबंध में मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मजबूती के साथ अपनी मांग को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि पिछले चार वर्षाें से प्रदेश के हर कोने से वरिष्ठता की मांग उठाई गई, लेकिन अभी तक इसे पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण प्रदेश के लगभग 70 हजार कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है। मुख्यमंत्री ने सभी बातों को ध्यान से सुना और इस मांग को अति शीघ्र पूरा करने की बात दोहराई। पिछले कल भी संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष घनश्याम शर्मा, एनजीओ फेडरेशन के अध्यक्ष अश्वनी ठाकुर, महासचिव राजेश शर्मा, सचिवालय यूनियन के अध्यक्ष भूपिंदर बॉबी, मुख्य सचिव आरडी धीमान, वित्त सचिव प्रबोध सक्सेना से उनके कार्यालय,सचिवालय में मिला था। हिमाचल अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सरकार भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता देने के वायदे को पूरा करें।
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार 2008 में पहली बार तत्कालीन भाजपा सरकार ने लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ चयन बोर्ड द्वारा भर्ती एवं पदोन्नित नियमों के अंतर्गत नियुक्त कर्मचारियों को अनुबंध आधार पर नियुक्त किया। निश्चित वैधानिक प्रक्रिया को पूरा करने के बाद भी कमिशन पास कर्मचारियों को प्रदेश के इतिहास का सबसे लंबा अनुबंधकाल दिया गया। उसके बाद आई सरकारों ने अनुबंध अबधि को कम किया, लेकिन कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से अपना कर्मचारी नही माना। सरकार कर्मचारी के सेवा की गणना उनके नियमितीकरण से कर रही है, नाकि उनकी प्रथम नियुक्ति से। यह लोकसेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा बोर्ड जैसी संबैधानिक संस्थाओं की मान्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाने जैसा है। कमीशन और बैच के आधार पर नियुक्त यह कर्मचारी सभी नियमों और सेवा शर्तों को पूरा करके नियुक्त हुए हैं। इसलिए इनकी सर्विसेज को प्रोमोशन और अन्य सेवालाभों के लिए नियुक्ति की तिथि से गिना जाए, नाकि नियमितीकरण की तिथि से। पूर्व में भी सरकार ने एडहॉक और टेन्योर बेसिस पर नियुक्त कर्मचारियों की सेवाओं को प्रोमोशन के लिए योग्य माना है तो अनुबंध पर दी गई सेवाओं को क्यों योग्य नही माना जा रहा?
नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता ना मिलने से जूनियर कर्मचारी सीनियर होते जा रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि उनका चयन भर्ती एवम पदोनती नियमों के अनुसार हुआ है। इसलिए उनके अनुबंध की सेवा को उनके कुलसेवाकाल में जोड़ा जाना तर्कसंगत है, जब हम पूरे नियमों के अंतर्गत नियुक्त हुए हैं, तो सरकार हमे पहले दिन से सरकारी कर्मचारी माने नाकि नियमितीकरण की तिथि से। यह प्रदेश के 70 हजार कर्मचारियों के मान सम्मान से जुड़ा विषय है। सरकार जल्द इस मांग को पूरा करे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष इस मांग को 50 से अधिक बार उठाया जा चुका है। मुख्यमंत्री खुद भी कह चुके हैं कि आपकी यह मांग जायज है। जेसीसी की बैठक में भी इस मांग पर कमेटी गठन की बात कही गई, लेकिन उसपर भी कोई कमेटी नही बनी। जेसीसी में अधिकांश मांगों पर कार्यवाही हुई है, लेकिन सेनिओरिटी के लिए कमेटी के गठन तक नहीं हुआ है, जिससे कर्मचारियों में निराशा है। नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता न मिलने से सेनिओरिटी लिस्ट में विसंगतियां आई हैं जिन्हें डेट ऑफ अपॉइंटमेंट से सेनिओरिटी देकर ही दूर किया जा सकता है।
इस संबंध में कर्मचारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री घनश्याम शर्मा ने अगले सप्ताह अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के साथ बैठक बुलाने की बात कही है। कर्मचारियों का कहना है कि बैठक के उपरान्त कर्मचारी साथियों की सहमति से आगामी निर्णय लिया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश महाजन, संगठन के प्रदेश महामंत्री अनिल सेन, प्रदेश उपाध्यक्ष बालकृष्ण, प्रदेश प्रवक्ता विजय राणा, प्रदेश प्रचार प्रमुख मुरारी लाल ठाकुर, शिमला जिलाध्यक्ष नंदलाल, कांगड़ा जिलाध्यक्ष सुनील पराशर, हमीरपुर जिला इकाई के मुख्य सलाहकार नरेश भारद्वाज, मंडी जिला इकाई के उपाध्यक्ष विनोद नायक, सुंदर नगर ब्लॉक के अध्यक्ष रणजीत सेन व अनिल शर्मा सहित प्रदेश के हर विभाग में कार्यरत लगभग 40 अनुबंध से नियमित कर्मचारी उपस्थित रहे।
