इंदौरा: मिनर्वा पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन संपन्न,सतत विकास पर हुआ गहन मंथन
इंदौरा स्थित Minerva PG College of Arts Science and Commerce में 28 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार रहे। उन्होंने अपने संबोधन में सम्मेलन की थीम “सतत ग्रह: 21वीं सदी की संभावनाएं और चुनौतियां” पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए सतत विकास की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के संतुलित उपयोग के बिना मानव जीवन की निरंतरता संभव नहीं है। साथ ही, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों एवं 169 लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर बल दिया।
इसके पश्चात कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष इंजीनियर जरनैल सिंह पटियाल ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत समाज और सतत ग्रह के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी के संरक्षण हेतु सभी को मिलकर कार्य करना होगा, तभी इन लक्ष्यों को साकार किया जा सकेगा।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें विशेषज्ञों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रो. (डॉ.) आदर्श पाल विग ने “शहरी पर्यावरण: समस्याएं और समाधान – पारंपरिक ज्ञान से सीखने की आवश्यकता” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए पारंपरिक ज्ञान से सीख लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं डॉ. एच. एस. बन्याल ने “उत्तर-पश्चिमी हिमालय की मछली विविधता: सतत ग्रह के लिए अवसर और चुनौतियां” विषय पर अपने विचार साझा किए।
ओरल प्रेजेंटेशन सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. पवन राणा, प्रो. डॉ. राजेश कुमार शर्मा, डॉ. सरिता पठानिया, डॉ. भगवती प्रसाद शर्मा, डॉ. कामाक्षी लुम्बा एवं डॉ. एच. एस. बन्याल द्वारा की गई। पोस्टर प्रेजेंटेशन सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. भग चंद चौहान, डॉ. नितेश कुमार तथा डॉ. आशुन चौधरी ने की।
तकनीकी सत्र का स्वागत भाषण डॉ. जगदीप वर्मा ने प्रस्तुत किया। इसके उपरांत प्रो. डॉ. पवन राणा ने “उत्तर-पश्चिमी भारतीय हिमालय के वनों को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले कीट आक्रमण: चुनौतियां एवं समाधान रणनीतियां” विषय पर मुख्य व्याख्यान देते हुए वनों पर कीटों के बढ़ते प्रभाव और उनके समाधान पर प्रकाश डाला।
इनवाइटेड टॉक सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. भग चंद चौहान ने की, जिसमें उन्होंने “सतत विकास और प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण” विषय पर अपने विचार रखते हुए प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रजनी द्वारा किया गया तथा सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट डॉ. इंदु ने प्रस्तुत की। इस अवसर पर प्रो. डॉ. दीपक पठानिया ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया।
इसके पश्चात पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें उत्कृष्ट शोध पत्रों एवं प्रस्तुतियों को सम्मानित किया गया। बेस्ट यंग रिसर्चर अवार्ड नीरज सोनी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जम्मू) को प्रदान किया गया।
ओरल प्रेजेंटेशन श्रेणी में प्रथम पुरस्कार डॉ. रिंकू शर्मा (आईसीएआर-आईवीआरआई क्षेत्रीय केंद्र पालमपुर) को, द्वितीय पुरस्कार डॉ. कमल वाटिका (चंडीगढ़ विश्वविद्यालय) को तथा तृतीय पुरस्कार डिम्पल (बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय) को प्रदान किया गया।
पोस्टर प्रेजेंटेशन श्रेणी में प्रथम पुरस्कार अस्मी चोपड़ा को, द्वितीय पुरस्कार चाहत (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) तथा तृतीय पुरस्कार अमनदीप (Minerva PG College of Arts Science and Commerce) और मानसी (केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश) को संयुक्त रूप से प्रदान किए गए।
अंत में प्राचार्य डॉ. प्रशांत कुमार ने सभी अतिथियों, विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण ढंग से किया गया।
