कांगड़ा : बीज मंत्रों की साधना से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव: आचार्य साक्षी चैतन्य
गरली में चल रही श्रीमद्देवीभागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। कथाव्यास आचार्य साक्षी चैतन्य ने 'ऐं, ह्रीं, क्लीं' महामंत्रों की उत्पत्ति और साधन-साध्य के दार्शनिक रहस्य को समझाया।
ऐतिहासिक एवं धरोहर गांव गरली में आयोजित भव्य श्रीमद्देवीभागवत महापुराण कथा के दिव्य प्रसंग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सुप्रसिद्ध कथाव्यास ज्योतिर्विद आचार्य साक्षी चैतन्य महाराज ने माँ भगवती के परम शक्तिशाली नवार्ण मंत्र 'ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' की अलौकिक महिमा का वर्णन किया। संगीतकमयी कथा के दौरान आचार्य ने न केवल इन बीज मंत्रों की ब्रह्मांडीय उत्पत्ति की कथा सुनाई, बल्कि मानव जीवन में 'साधन' और 'साध्य' के गहरे आध्यात्मिक संबंध को भी अत्यंत सरल शब्दों में रेखांकित किया।
कथाव्यास आचार्य साक्षी चैतन्य ने देवी भागवत के गूढ़ प्रसंगों का संदर्भ देते हुए बताया कि नवार्ण मंत्र का प्रत्येक अक्षर अपने आप में संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा को समेटे हुए है। उन्होंने कथा के माध्यम से समझाया कि व्यासपीठ से जीवन प्रबंधन के व्यावहारिक सूत्रों को जोड़ते हुए आचार्य साक्षी चैतन्य ने कहा कि आज का मनुष्य भटक रहा है क्योंकि वह 'साधन' को ही 'साध्य' मान बैठा है।
कथा के दौरान जब आचार्य ने माँ कालरात्रि के प्राकट्य, चण्ड-मुण्ड वध और भक्त सुदर्शन की कथाओं का जीवंत वर्णन किया, तो पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। संगीत दल द्वारा प्रस्तुत किए गए दिव्य भजनों और बांसुरी की मधुर तानों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने पर मजबूर हो गए। कथा के विश्राम पर मुख्य यजमानों सहित स्थानीय नागरिकों ने व्यासपीठ की आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
