कांगड़ा: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में "भारतीय ज्ञान परंपरा" विषय पर हुआ एक दिवसीय सेमिनार
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वेदव्यास परिसर में सोमवार को "भारतीय ज्ञान परम्परा" विषय पर व्याख्यान का आयोजन परिसर सह निदेशक प्रो. मंजुनाथ एस.जी. की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। डिजिटल लर्निंग एंड मॉनिटरिंग सेल एवं ज्योतिष विद्या शाखा के तत्वाधान में हुई इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में कवि कुलगुरु कालीदास के वास्तु विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रसाद गोखले ने शिरकत की। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा पर प्रकाश डालते हुये कहा कि प्रत्यक्षं ज्योतिषं शास्त्रं अर्थात् ज्योतिष शास्त्र प्रत्यक्ष शास्त्र है और छाया से समय का ज्ञान कर सकते हैं।
उन्होंने भारतीय जीवन में ग्रहों के महत्त्व को समाज के परिप्रेक्ष्य में समझाया। प्रो. प्रसाद गोखले के अनुसार अत्यन्त धीरे-धीरे चलने वाला ग्रह शनि ग्रह है। उन्होंने ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न नामों से परिचित करवाया जेसै प्रत्यक्ष शास्त्र, कालविधान शास्त्र आदि। उन्होंने भारतीय परम्परा में महीनों के नामों को भी बहुत बारीकी से समझाया। इससे पूर्व टोपी, शॉल व पुष्पगुच्छ दे कर मुख्यवक्ता का स्वागत किया गया। वहीं परिसर के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज श्रीमाल ने उनका वाचिक स्वागत किया। वहीं सारे कार्यक्रम में मंच का संचालन ज्योतिष विषय के सहायकाचार्य डॉ. शैलेश तिवारी ने किया। उन्होंने श्लोकोच्चारण के माध्यम से ही इस कार्यशाला की सारी रूपरेखा को समझाया।
कार्यशाला के दौरान इसमें भाग लेने वाले छात्र छात्राओं एवं समिति सदस्यों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. मंजुनाथ एस.जी. ने छात्रों को मुख्य वक्ता के द्वारा प्रतिपादित ज्ञान को आत्मसात करने के लिये अभिप्रेरित किया। कार्यक्रम के अन्त में डॉ. विनोद शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम के दौरान संगणक विभागाध्यक्ष अमित वालिया सहित डॉ. हरि ओम, डॉ. यज्ञदत्त, डॉ. भूपेन्द्र कुमार ओझा, डॉ. गोविन्द शुक्ल, डॉ. दीप कुमार, डॉ. विनोद शर्मा, गोविन्द दीक्षित, कृष्ण कुमार द्विवेदी, अमरचन्द, डॉ. रूपलाल, प्रमोद कुमार एवं परिसर के कर्मचारी और छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। शान्तिमन्त्र के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
