कांगड़ा: पूर्व सैनिक की विधवा बेटी का सहारा बनी सेना, लगाई पेंशन
तहसील खुंडियां के गांव बलाहड़ की कौशल्या देवी का सेना सहारा बनी। फरवरी 1972 में उनके माता-पिता ने उनका विवाह किया था। कुछ समय तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन बाद में उनके पति की नौकरी चली गई और परिवार का गुजारा मेहनत-मजदूरी से होने लगा। दिसंबर 2009 में अचानक उनके पति का निधन हो गया, जिसके बाद कौशल्या देवी अपने माता-पिता पर निर्भर हो गईं। कोरोना काल के दौरान अप्रैल 2020 में उनके पिता लाल सिंह का देहांत हो गया और चार साल बाद जून 2024 में उनकी माता विद्या देवी भी चल बसीं। इससे कौशल्या देवी पूरी तरह अकेली रह गईं और आर्थिक संकट का सामना करने लगीं।
पूर्व सैनिक लीग खुंडियां के चेयरमैन एवं समाजसेवी रिटायर्ड कर्नल एम.एस. राणा ने बताया कि जुलाई 2024 में डीएससी रिकॉर्ड के माध्यम से कौशल्या देवी की डिपेंडेंट पेंशन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई थी। रिकॉर्ड में उनकी जन्म तिथि और सिविल दस्तावेजों में अंतर पाया गया, जिसे ठीक करवाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। सितंबर 2025 में पूर्व सैनिक लीग खुंडियां की टीम ने सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर जिला सैनिक कल्याण विभाग धर्मशाला के माध्यम से रिकॉर्ड कार्यालय भेजे। इसके बाद सेना की ओर से कौशल्या देवी को लगभग 18 हजार रुपये की मासिक डिपेंडेंट पेंशन स्वीकृत कर दी गई, जिससे उन्हें आर्थिक सहारा मिला है।
कौशल्या देवी ने इस सहयोग के लिए भारतीय सेना, जिला सैनिक कल्याण विभाग धर्मशाला के डिप्टी डायरेक्टर कर्नल गोपाल सिंह गुलेरिया तथा पूर्व सैनिक लीग खुंडियां की टीम—कर्नल एम.एस. राणा, कैप्टन कर्म सिंह, कैप्टन कश्मीर सिंह, सूबेदार मेजर माधो राम, सूबेदार मेजर रणबीर सिंह और नायब सूबेदार अमर सिंह—का निस्वार्थ सेवा के लिए आभार व्यक्त किया है। कर्नल राणा ने बताया कि ऐसे मामलों में उन्हीं बेटियों को डिपेंडेंट पेंशन मिलती है जिनके परिवार की मासिक आय नौ हजार रुपये से कम हो और जो अन्य निर्धारित शर्तों को भी पूरा करती हों। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक लीग खुंडियां सैन्य परिवारों के कार्यों में मदद करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है और खुंडियां के अलावा बाहरी क्षेत्रों के परिवार भी यहां से अपने कार्य करवाने आते हैं।
