कांगड़ा: ज्वालामुखी कॉलेज के नामकरण पर उठे सवाल, जानें पूरा मामला
विधानसभा क्षेत्र ज्वालामुखी के अंतर्गत अंब पठियार स्थित राजकीय महाविद्यालय ज्वालामुखी का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी पंडित सुशील रत्न राजकीय महाविद्यालय ज्वालामुखी किए जाने के मामले में सवाल उठना शुरू हो गए हैं। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर एक नोटिस भी वायरल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रणजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने नोटिस के माध्यम से वर्ष 1905 से 1947 तक पंडित सुशील रत्न के योगदान संबंधी दस्तावेज मांगे हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या महाविद्यालय में कोई लाइब्रेरी या रिकॉर्ड उपलब्ध है, जहां उनके सम्मान और उपाधियों का उल्लेख हो। यदि गलत तथ्यों के आधार पर कॉलेज का नामकरण किया गया है तो यह गंभीर विषय है। वहीं, पंचायत की वर्तमान प्रधान सुमन लता ने कहा कि पंचायत को इस संबंध में पूर्व सूचना नहीं दी गई।
उनका कहना है कि मुख्यमंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की गई थी, जिसके बाद नामकरण किया गया। उधर, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चंदन भारद्वाज ने इसे किसी की शरारत करार दिया है। उनका कहना है कि सभी औपचारिकताएं और सरकारी नोटिफिकेशन पूरे होने के बाद ही नामकरण किया गया है। इस मामले में विधायक संजय रत्न ने कहा कि ऐसा कोई भी नोटिस उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। पिता ने देश के लिए अपना बलिदान ओर योगदान दिया है। कॉलेज का नाम सरकार की ओर से रखा गया है। नोटिस का कोई औचित्य ही नहीं है। देश में हजारों ऐसे संस्थान है, जहां बलिदानियों और स्वतंत्रता सेनानियों के ऊपर कॉलेज स्कूलों के नाम रखे गए हैं।
