सोलन: देओघाट में RERA नियमों को ताक में रख कर अवैध निर्माण, उपायुक्त से कार्रवाई की मांग
सोलन के देओघाट क्षेत्र में अवैध निर्माण, सड़क अवरोध और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जहां सोलन के एक प्रतिष्ठित कारोबारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सड़क और बिजली लाइन को भी क्षतिग्रस्त किया जा रहा है और आरोप लगाया जा रहा है कि यह मामला रेरा के अधीन आता है तथा रेरा से कोई अनुमति नहीं ली गई है।
स्थानीय निवासी पीहा वर्मा ने उपायुक्त सोलन को लिखित शिकायत भेजकर तुरंत हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, देओघाट मुख्य बाजार से श्रम एवं रोजगार कार्यालय को जोड़ने वाली नगर निगम की सड़क, जो पिछले करीब 24 वर्षों से आम उपयोग में है, उसे अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त किया जा रहा है। यह सड़क न केवल संबंधित आवेदक के प्लॉट्स तक पहुंच प्रदान करती है, बल्कि आसपास के कई घरों और सरकारी कार्यालयों के लिए भी महत्वपूर्ण मार्ग है।
पीहा वर्मा ने बताया कि खसरा नंबर 817 में आशा देवी व अन्य द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है। आरोप है कि इस निर्माण के दौरान उक्त एमसी सड़क को बंद करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कानूनी रूप से गलत है। उन्होंने भारतीय उपबंध अधिनियम, 1882 का हवाला देते हुए कहा कि इस सड़क पर उनका स्थायी एवं निर्बाध अधिकार है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्माण कार्य के दौरान पेड़ों को उखाड़कर जलाया गया और सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइट्स को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इससे न केवल पर्यावरण को क्षति हुई है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आवेदक ने आरोप लगाया है कि निर्माण स्थल पर करीब 50 फीट तक ऊर्ध्वाधर कटाई की गई है, जो नियमों के विरुद्ध है। नियमानुसार 3.5 मीटर से अधिक कटाई की अनुमति नहीं होती। इसके अलावा, यह कार्य पास से गुजर रही 33 केवी बिजली लाइन के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि परियोजना क्षेत्र 2500 वर्गमीटर से अधिक है, जिससे यह मामला रेरा (RERA) के दायरे में आता है, लेकिन इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकरण को नहीं दी गई है और नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य किया जा रहा है।
पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं: निर्माण कार्य को तुरंत प्रभाव से रोका जाए, निर्माण स्वीकृति की जांच करवाई जाए, 33 केवी बिजली लाइन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अवैध पेड़ कटान की जांच हो, सरकारी भूमि में की गई कटाई की जांच हो तथा उक्त सड़क को किसी भी हालत में बंद न होने दिया जाए। साथ ही, पीहा वर्मा ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा।
