कांगड़ा : भगवान कृष्ण का चरित्र युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : हरिशानंद
दिव्य ज्योति जागृत संस्थान की ओर से आज मटौर में आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी हरिशानंद ने प्रभु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण का चरित्र युवा वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है। आज भौतिकतावाद की अंधी दौड़ में युवा वर्ग के पास भौतिक सुख सुविधाएं हैं, परंतु मानसिक शांति न होने के कारण वह चिंता एवं अवसाद से मुक्ति के लिए नशे की दलदल में फंस कर अपनी चारित्रिक शक्ति और नैतिक मूल्यों का ह्रास कर रहा है।
नशे की परिभाषा देते हुए स्वामी जी ने बताया कि "न शम शांतिर्मया इति नशा" अर्थात जिसके तनिक भी शांति नहीं, वही नशा है। अवसाद से मुक्ति का उपाय नशा नहीं, अपितु इस मानसिक व्याधि को खत्म करने के लिए आत्मिक शक्ति के विकास की आवश्यकता है। हमारे राष्ट्र भक्तों ने राष्ट्र भक्ति का नशा किया और चारित्रिक विकास से ओतप्रोत हो भारत माता को स्वतंत्रता दिलाई।
चरित्र भारत भूमि का आधार है और आज उसी धर्म भूमि भारत में अधिकतर युवा शक्ति का चारित्रिक पतन हो रहा है। आवश्यकता है कि युवाओं को ब्रह्म ज्ञान की शक्ति से जागृत होकर राष्ट्र में अग्रगण्य भूमिका निभाने की। आज के युवाओं के आदर्श यदि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, स्वामी विवेकानंद इत्यादि होंगे तो भारत को फिर से जगतगुरु के पद पर आसीन किया जा सकता है।
इस अवसर पर प्रकृति और संस्कृति का रक्षण करने के लिए स्वामी जी युवा शक्ति को जागरूक करवाते हुए संकल्प भी दिलवाया। सत्संग के दौरान समस्त सत्संग प्रेमियों ने प्रसाद रूप में भोजन किया और कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
