आपदा से निपटने के लिए विधायक निधि में की जाएगी कटौती : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक आपदा प्रभावितों को राहत पैकेज देने की घोषणा कर चुकी है और इसके लिए हर तरह की कटौती की जाएगी। सरकार के पास सीमित बजट है, ऋण भी एक सीमा तक ही ले सकते हैं। सरकार विधायक निधि में कटौती करेगी, तभी आपदा से हुए नुकसान की कुछ भरपाई कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष राष्ट्रीय आपदा शब्द ही नहीं निकाल रहा।
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उन्होंने विपक्ष से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा घोषित कर पीड़ितों के लिए उदार मदद देने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी चुटकी ली कि मदद लेने के लिए विपक्ष की नीयत भी तो साफ होनी चाहिए। मुख्यमंत्री श्रीनयना देवी के भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के चर्चा में हिस्सा लेने के दौरान स्थिति स्पष्ट कर रहे थे। रणधीर आपदा पर नियम १०२ के तहत सरकार की ओर से रखे प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा ले रहे थे। सीएम ने कहा कि ४८ घंटे में बिजली-पानी बहाल करने के लिए मंत्रियों ने दिन-रात मेहनत की।
अगर पानी की बहाली हुई तो उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बहुत मेहनत की। सड़कें बहाल करने में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने परिश्रम किया। इससे पहले रणधीर शर्मा ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए सरकार में आपसी तालमेल नहीं है। आपदा के निरीक्षण के लिए मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्री अलग-अलग जा रहे हैं। आपदा के बाद सर्वदलीय बैठक तो दूर दस दिन तक कैबिनेट की बैठक तक नहीं बुलाई गई। कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलीं, उन्होंने आर्थिक सहायता मांगी, लेकिन राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग तक नहीं उठाई।
