हिमालय मंच की पहल को भूल गई नगर निगम
हिमालय साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच के अध्यक्ष और लेखक एसआर हरनोट ने जहां शिमला नगर निगम द्वारा शिमला के हर वार्ड में बुक कैफे खोलने का स्वागत किया है वहीं रिज मैदान पर टका बैंच में स्थित बुक कैफे को निजी हाथों सौंपने का पहले की तरफ कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस बुक कैफे को निजी हाथों सौंपने के बाद इसका मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया और यह एक ढाबे में बदल दिया गया है। हरनोट ने स्मरण करवाया कि शिमला बुक कैफे की लोकप्रियता में हिमालय मंच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और देश भर से लगभग पांच सौ किताबे यहां के लिए उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से जो भी लेखक शिमला आते थे, उनके साथ बैठकें यहीं पर होती थी। इन बैठकों से देश भर में इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। दूसरा कारण इसकी लोकप्रियता का जेल के कारावासी थे जो बिलकुल नया कॉन्सेप्ट था और लोग हैरान होते है कि उम्र कैदी भी इस तरह स्वतंत्र कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जेल के पास यह रहता तो कभी भी बंद न होता और यह शिमला का एक लैंडमार्क बन जाता।
उन्होंने बताया कि शिमला के वार्डों में बुक कैफे खोलने का लिखित सुझाव हिमालय साहित्य मंच ने तत्कालीन आयुक्त पंकज राय को उनके साथ हुई बैठक में दिया था। जिसमें उनके साथ मंच के सदस्य लेखक प्रो मीनाक्षी एफ पॉल, डॉ विद्यानिधि, डॉ कुलराजीव पंत, आत्मा रंजन, सीता राम शर्मा, मधु शर्मा कात्यायनी, भारती कुठियाला, स्नेह नेगी, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, वंदना राणा, सतीश रत्न आदि कई लेखक शामिल थे। उन्होंने इस सुझाव की प्रशंसा करते हुए उसे तत्काल माना ही नहीं बल्कि हमारे साथ छोटा शिमला, संजौली और टूटी कंडी विजिट भी किया और इन्हें खोलने के लिए सारी औपचारिकताएं पूर्ण की। परंतु हमारी पहल को निगम और मीडिया ने भुला दिया।हिमालय मंच ने प्रदेश सरकार और नगर निगम से अनुरोध किया है कि शिमला रिज टका बेंच पर स्थित बुक कैफे को पहले की तरह जेल के कारावासियोंं को संचालन के लिए दें। उसका निजी करण न करें। साथ सभी बुक कैफे में लेखकों की साहित्यिक भागीदारी भी सुनिश्चित करें।
