अब राज्य में कहीं भी अपने परमिट का नवीनीकरण करवा सकेंगे भेड़ पालक
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भेड़ पालकों को सुविधा देने के लिए अब वन विभाग ने दस्तावेज एकत्रित कर भेड़ पालकों के चरान परमिट डिजिटाइज करने का फैसला किया है। भेड़ पालक राज्य में कहीं भी अपने परमिट का नवीनीकरण करवा सकेंगे। वन विभाग द्वारा चरान परमिट के लिए वेब आधारित एप्लीकेशन तैयार कर दी गई है और आगामी वित्त वर्ष में चरान परमिट पूरी तरह डिजिटाइज हो जायेंगे साथ ही चरान परमिट के नवीनीकरण की अवधि तीन से बढ़ाकर छह वर्ष कर दी गई है।
जंगलों में चारा प्रजाति के पौधों को बढ़ावा
भेड़ पालकों को चारागाह मार्गों में किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए अब जंगलों में चारा प्रजाति के पौधों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके लिए कैंपा तथा अन्य विभिन्न योजनाओं के तहत बजट का प्रावधान किया जा रहा है। अब चारागाह मार्गों को भी डिजिटाइज किया जा रहा है। पहले चरण में आठ चारागाह मार्गों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। जिला चंबा, कांगड़ा के अधिकतर प्रयोग होने वाले आवागमन के रास्तों में तीन-तीन कुल स्थानों को चिह्नित कर एकीकृत विकास योजना के तहत डंपिंग टैंक, सरोवर एवं अस्थायी शेड की सुविधा आगामी तीन महीने के भीतर विकसित की जाएगी। चारागाह क्षेत्रों में लैंटाना प्रमुखता से हटाया जा रहा है।
हेल्पलाइन नंबर किए जाएंगे स्थापित :पठानिया
वन मंत्री राकेश पठानिया का कहना है कि भेड़ पालकों के भेड़, बकरियों के चोरी रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं, पुलिस महानिदेशक ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि पशु चोरी की घटनाओं पर त्वरित पुलिस सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि भेड़ पालकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे और इन नंबरों के बारे में सभी भेड़ पालकों को सूचित किया जाएगा ताकि आपदा की स्थिति में भेड़ पालकों को त्वरित सहायता प्रदान की जा सके
