शिमला :उपचुनावी पिच तक भी नहीं पहुंची राजीव शुक्ला की बाॅल
-न मंडी संसदीय क्षेत्र जाएंगे ,न ही जुब्बल-काेटखाई और फतेहपुर
हिमाचल प्रदेश में तीन उपचुनाव तय है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला की गेंद अभी पिच से बाहर है। यानी उनका हिमाचल दाैरा प्रस्तावित है, लेकिन मंडी संसदीय क्षेत्र, जुब्बल-काेटखाई और फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र का दाैरा तक नहीं कर पाएंगे। कारण साफ है कि राजीव शुक्ला का टूअर प्राेग्राम जिसने भी तैयार किया उसे यह मालूम नहीं हैं कि प्रदेश में तीन उपचुनाव हाेने हैं। सबसे बड़ा उपचुनाव मंडी संसदीय क्षेत्र का है। यहां 17 विधानसभा क्षेत्र हैं, मगर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला काे किसी एक विधानसभा क्षेत्र में मीटिंग करवाने के बारे में साेचा तक नहीं। हालांकि पीसीसी ने 8 जुलाई काे मंडी में बैठक रखी है, लेकिन राजीव शुक्ला उससे पहले ही दिल्ली रवाना हाेंगे। पार्टी के हिमाचल प्रदेश के प्रभारी राजीव शुक्ला का टूअर प्रोग्राम जो कि हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी किया गया है चर्चा का विषय बन चुका है।
जहां यह दौरा प्रदेश में आने वाले दो विधानसभा और मंडी संसदीय चुनाव क्षेत्र के उपचुनाव को लेकर है, वहीं राजीव शुक्ला के दौरे से दोनों विधानसभा चुनाव क्षेत्र और मंडी संसदीय चुनाव क्षेत्र ग़ायब हैं। सूत्रों की अगर मानें तो कहा जा रहा है कि शुक्ला ख़राब सेहत के चलते सड़क से दौरा नहीं कर सकते इसलिए उनकी सुविधा के अनुसार उन्हीं जगहों पर मीटिंग बुलाई जाती है जो की हवाई अड्डे के नज़दीक हों। शुक्ला के दौरे को लेकर जो कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जारी किया है उसमें जहां वो अन्य लोगों से मुलाक़ात करेंगे जिनमें कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, नेता विपक्ष, चुने हुए विधायक एवं पूर्व विधायक तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी शामिल हैं के साथ ही साथ वह धर्मशाला नगर निगम में पार्टी चिन्ह पर जीत करके आए कांग्रेस के पार्षदों से भी मिलेंगे जबकि कांगड़ा ज़िले में पालमपुर भी नया नगर निगम बना है और वहाँ पर कांग्रेस की विचारधारा और कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जो लोग जीत करके आए हैं और नगर निगम का गठन किया है उन्हें दरकिनार रखा गया है। दरअसल, तो पंचायतीराज संस्थानों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है इसमें चाहे पंचायत समितियों के चुनकर आए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष हों या कांगड़ा जिला के जीत करके आए जिला परिषद सदस्य हों किसी को भी समय नहीं दिया गया है। पंचायती राज संस्थानों में जीत कर आए कांग्रेस के कुछ पदाधिकारीयों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र मात्र कुछ प्रतिशत तक ही है। अधिकांश हिमाचल गाँव में बसता है अगर कांग्रेस पार्टी इसी प्रकार पंचायती राज संस्थानों और पंचायतों में चुनकर क्या है अपनी विचारधारा वाले लोगों से दूरी बनाकर के रखेगी तो आने वाले समय में जो विधानसभा चुनाव होंगे तो इसका भारी नुक़सान हो सकता है। लोगों की मानें तो उनका यह भी कहना है की ये कार्यक्रम ऐसे लोगों द्वारा बनाया गया है जिनको की राजनीति का अनुभव नहीं है। इस दौरे को लेकर दौरा शुरू होने से पहले ही जो हवाओं का बाज़ार गर्म हुआ है उससे तो ये लगता है कि कांग्रेस पार्टी खुद ही ये तीनों उपचुनाव जीतने के लिए इच्छुक नहीं है। दूसरी तरफ़ प्रदेश सरकार वह भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीनों उपचुनावों के लिए गर्मजोशी के साथ तैयारी शुरू कर दी गई है। भारतीय जनता पार्टी की अगर मानें तो तीनों चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दे दिए हैं और बूथ स्तर पर कार्य किया जा रहा है वहीं कांग्रेस पार्टी जहाज़ से नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही कांग्रेस के लिए वो कहावत सच्चाई का रूप ले चुकी है की “रस्सी जल गई मगर बल नहीं गया”।
