छात्रों के दस्तावेज रोकने वाले विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द हो: अभाविप
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पिछले कई वर्षों से शिक्षा के नाम पर हो रहे व्यापार और शिक्षा में हो रहे फर्जीवाड़े के विरुद्ध संघर्षरत है और विद्यार्थी परिषद ने इस बारे में नियामक आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन भी सौंपे है और उनके समक्ष शिक्षा में हो रहे व्यापार और फर्जी डिग्री मामले और करोड़ों में हो रहे छात्रवृत्ति घोटालों की जानकारी विस्तारपूर्वक नियामक आयोग के अध्यक्ष के समक्ष रखी है लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक इन शिक्षा माफियों के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह मंत्री विक्रांत चौहान ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि ऊना के निजी विश्वविद्यालय इंडस इंटरनेशनल विश्वविद्यालय का एक छात्रवृति घोटाले वाला मामला उजागर हुआ है जिसमे विश्वविद्यालय ने अनुसूचित जाति के छात्रों के सभी दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं ताकि अनुसूचित जाति के छात्रों को आने वाली छात्रवृत्ति को आसानी से लूटा जा सके। विक्रांत चौहान ने कहा कि विश्विद्यालय द्वारा की जा रही इस हरकत के कारण छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है छात्र आगामी शिक्षा लेने और ओरिजनल दस्तावेज न होने के कारण किसी भी परीक्षा फॉर्म भरने के लिए छात्र सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा की त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार ने विश्वविद्यालय के ऊपर 11 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है अभाविप सरकार के इस निर्णय का स्वागत करती है लेकिन जुर्माना लगाना ही एकमात्र इस समस्या का समाधान नहीं है उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षा माफियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए और ऐसे विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द होनी चाहिए ताकि ऐसे मामले द्वारा सामने न आए।
विक्रांत ने कहा कि इस प्रकार का तानाशाई रवैया शांतिप्रिय राज्य हिमाचल प्रदेश में कतई सहन नहीं किया जाएगा और विद्यार्थी परिषद् मांग करती है कि शीघ्र छात्रों के दस्तावेज उन्हे वापिस किए जाए ताकि छात्रों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने हिमाचल प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है, ऐसे समय में विद्यार्थी परिषद की मांग है कि ऐसे विश्विद्यालयों को चिन्हित करते हुए उनके ऊपर कड़ी कार्रवाई करते हुए इन शिक्षा माफियों की गिरफ्तारी की जाए और ऐसे विश्वविद्यालयों की मान्यता रद्द की जाए ताकि भवि ष्य में कोई भी शिक्षा को बेचने की वस्तु समझकर व्यापार ना चलाएं।
