शिमला : हिमाचल के निर्माण एवं पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त करने में डॉ. परमार का सहयोग अतुलनीय : विस अध्यक्ष
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डॉ. यशवंत सिंह परमार के 117वें जन्म दिवस पर हिमाचल सरकार तथा विधानसभा सचिवालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को विधानसभा सचिवालय के पुस्तकालय कक्ष में संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि डॉ. यशवंत सिंह परमार एक महान योद्धा थे। उनके बलिदान को हिमाचल कभी भूला नहीं सकेगा। कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार द्वारा प्रदेश को दी गई सौगातें सदियों तक याद जाएंगी। पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार ने जहां 15 अप्रैल 1948 को हिमाचल निर्माण तथा 1 नवंबर 1966 को विशाल हिमाचल के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं 25 जनवरी, 1971 को हिमाचल प्रदेश को भारतीय गणराज्य का 18वां राज्य घोषित करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार सड़कों को हिमाचल की जीवन रेखा बताते थे। उन्हें मालूम था हिमाचल एक पहाड़ी राज्य है यहां सड़कों के विना विकास संभव नहीं है। इसलिए वह समय-समय पर केंद्र सरकार के समक्ष सिर्फ सडक और सडक के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहें। पठानिया ने कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल के लिए अनेकों लड़ाइयां लड़ी हैं, जिस वजह से आज हिमाचल का अस्तित्व कायम है। पठानिया ने कहा कि आज हिमाचल को फल राज्य मानते हैं जिसका श्रेय डॉ. यशवंत सिंह परमार को जाता है, जिन्होंने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए हिमाचल प्रदेश में वानिकी एवं बागवानी विश्व विद्यालय की स्थापना की थी, जिस वजह से आज हिमाचल का सेव राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है।
कार्यक्रम के दौरान सभागार में मौजूद गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जहासूचना एवं जन सम्पर्क विभाग द्वारा डॉ. यशवंत सिंह परमार पर तैयार किए गए वृतचित्र का अवलोकन किया गया। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष द्वारा डॉ. परमार के परिवारजनों को टोपी व मफलर पहनाकर सम्मानित किया गया।
