शिमला : पांच दिवसीय आजादी का अमृत महोत्सव संगोष्ठी का हुआ समापन
भारतीय पत्रकार कल्याण मंच द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आजादी का अमृत महोत्सव का समापन पांचवें दिन के मुख्य अतिथि बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रांत संयोजक व पूर्व एचपी एसएससी के चेयरमैन भारत भूषण भारती ने किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय विश्राम गृह में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में पूर्व मंत्री करण देव कंबोज विधायक सुभाष सुधा व सदस्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार सूरजभान कटारिया मुख्य रूप से उपस्थित हुए। भारतीय पत्रकार कल्याण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन आश्री व राष्ट्रीय महासचिव मेवा सिंह राणा ने मुख्य अतिथि भारत भूषण भारती पूर्व मंत्री करण देव कंबोज विधायक सुभाष सुधा व सूरजभान कटारिया को बुके भेंट कर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। आजादी के 75 साल पूरे होने पर आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि भारत भूषण भारती ने कहा कि पूरे भारतवर्ष में शहीदों के नाम समर्पित आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। यह वर्ष जहां आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के नाम रहेगा वही इस वर्ष उन बलिदानी वीर शहीदों को भी याद किया जाएगा जिनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो पाया। आजादी का अमृत महोत्सव वास्तव में शहीदों के बलिदानों को नमन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने का महोत्सव है। उन्होंने कहा कि ऐसे घूमना शहीदों के परिवारों को ढूंढ कर उन्हें सम्मानित करने का काम किया जाएगा। जिसमें पत्रकारों की भूमिका अहम रहेगी। आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता ने जो अलख पूरे देश में जगाई थी। उसी की बदौलत स्वतंत्रता का आंदोलन आजादी के रूप में परिणित हुआ था। उन्होंने कहा कि देश उन पत्रकारों का भी सदा ऋणी रहेगा जिन्होंने अंग्रेजों के सामने डटकर लेखनी का प्रयोग किया और उनकी यात्राएं झेली। उन्होंने कहा कि जहां कोई नहीं पहुंच सकता वहां पत्रकार मौजूद हो सकता है। इसलिए ऐसी जानकारी पत्रकारों के माध्यम से सरकार को प्राप्त हो सकती है और देश पर बलिदान होने वाले शहीदों के परिवार को सम्मान दिया जा सके। विधायक थानेसर सुभाष सुधा ने कहा कि यह देश के लिए बड़े गौरव की बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर विश्व भर में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। देश पर प्राण निछावर करने वाले शहीदों के साथ साथ उन शहीदों को भी यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिनका नाम और दिन का जिक्र आज तक देश नहीं कर पाया। इस आजादी को दिलाने के लिए न जाने कितने वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है। इनमें से बहुत सारे स्वतंत्रता के दीवाने ऐसे भी थे जो इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गए हैं। उन सभी वीर बलिदानियों को समर्पित यह आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रांत सह संयोजक राजीव मल्होत्रा ने संगोष्ठी में विचार रखते हुए कहा कि जिस प्रकार से आजादी के लिए आंदोलन चलाए गए और बलिदान दिए गए। उसी प्रकार से पत्रकारों ने भी आजादी की अलख जगाने के लिए और स्वतंत्रता को जन आंदोलन बनाने के लिए अहम भूमिका उस समय अदा की थी। पत्रकारिता का वह दौर लोकमान्य तिलक जैसी पत्रकारों और स्वतंत्रता सेनानियों का था। भारतीय पत्रकार कल्याण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन आश्री ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मंच पत्रकारिता के साथ-साथ समाज हित और देश हित के ऐसे मुद्दों को उठाता रहता है इनका सीधा सरोकार देश की आम जनता के साथ होता है। आजादी का अमृत महोत्सव इसलिए भी खास महत्व रखता है क्योंकि पत्रकारिता जगत से जुड़े बहुत से पत्रकारों ने आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों की यातनाएं झेली। इसीलिए मंच नहीं आजादी का अमृत महोत्सव से प्रेरित होकर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया है।
